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गेहूं के समर्थन मूल्य में 40 रुपये की बढ़ोतरी किसानों के साथ मजाक

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इंद्रजीत - फोटो : ETAWAH
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बकेवर। रबी की फसल के बढ़े समर्थन मूल्य से किसान संतुष्ट नहीं है। किसानों का कहना है कि गेहूं का मूल्य 2500 रुपये प्रति क्विंटल होना चाहिए। कृषि लागत में जिस अनुपात में वृद्धि हुई है।
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उस हिसाब से उपज का समर्थन मूल्य नहीं बढ़ाया गया है। उपज की सरकारी खरीद बेहतर तरीके से न होने के कारण किसानों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ता है। मंडी में आढ़तिया किसानों की उपज को मनमाने मूल्य पर खरीदता है। जिससे किसानों को नुकसान होता है।
नगला तिवारी गांव निवासी सतीश तिवारी कहते है कि सरकार ने गेहूं पर समर्थन मूल्य मात्र 40 रुपये बढ़ाकर किसानों के साथ मजाक किया है। गेहूं रबी की मुख्य फसल है। खेतीं से संबंधित जुताई, मजदूरी, खाद बीज के मूल्यों में काफी वृद्धि हुई है।
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ग्राम नवादा निवासी विजय प्रताप कहते है कि अगर छोटे किसान के एक एकड़ खेत में 20 क्विंटल गेहूं होता है तो उसे सरकारी केंद्र पर गेहूं बेचने पर आठ सौ रुपये पिछली साल से अधिक मिलेंगे। किसान की साल भर की मेहनत में मात्र आठ सौ रुपये की वृद्धि।
ग्राम चिंडोली निवासी इंद्रजीत कहते है किसान की कोई चिंता किसी सरकार को नही है। पहले खरीफ की फसल की उपज में समर्थन मूल्य में कोई खास वृद्धि नही की। अब रबी की फसल की उपज में भी किसानों को केंद्र सरकार ने कोई खासी राहत नही दी।
ग्राम केशोंपुर निवासी बैकुंठ नाथ पांडेय कहते है कि आज खेती की लागत बहुत महंगी है। गेहूं का समर्थन मूल्य 2500 रुपये प्रति क्विंटल करना चाहिए। सरकार अभी भी दो दशक पूर्व के अनुसार समर्थन मूल्य बढ़ा रही है।

विजय प्रताप- फोटो : ETAWAH

सतीश तिवारी- फोटो : ETAWAH

वैकुंठ नाथ पांडेय,- फोटो : ETAWAH

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