इटावा। बसरेहर ब्लाक की अगुपुर गोपालपुर ग्राम पंचायत में बनी गोशाला में दो गोवंशों की शुक्रवार को मौत हो गई। जबकि, तीन गोवंशों की हालत गंभीर है। इधर, अगुपुर गोपाल के साथ ही जिले की अन्य ग्राम पंचायतों में बनी गोशालाओं की हालत बारिश ने खराब कर दी है।
गोशालाओं परिसर का अधिक हिस्सा दलदल में बदल गया है। इससे वहां संरक्षित किए गए गोवंशों के साथ ही कर्मचारियों को भी कामकाज करने में दिक्कत हो रही है।
अगुपुर गोपालपुर ग्राम पंचायत में बनी गोशाला में इस समय 120 गोवंश हैं। इनमें से दो गोवंशों की शुक्रवार को मौत हो गई। तीन गोवंश ज्यादा बीमार हैं।
गोशाला की देखभाल करने वाले कर्मचारी बृजेश उर्फ बाबा, रविंद्र सिंह ने बताया कि बारिश के दौरान गोशाला परिसर के अधिकांश हिस्से की जमीन दलदल हो गई है।
इससे गोवंशों के साथ ही उन लोगों को दिक्कत हो रही है। पानी भरा होने व दलबल से उन लोगों के पैर कटने लगे हैं। गोवंश भी दलदल में फंसने से जमीन पर गिर जाते हैं।
इससे गोवंश चुटहिल व बीमार हो रहे हैं। बारिश न थमने की वजह से काफी देर तक गोवंशों के शव परिसर में पड़े रहे। उन्हें दफनाया नहीं जा सका। ग्राम प्रधान श्रृति देवी के पति अवधेश ने बताया कि गोशाला में परौली रामयन से जो गोवंश शिफ्ट किए गए थे। उन्हीं में से बीमार दो गोवंशों की मौत हुई है। कई अभी बीमार हैं।
चार गोवंश की हालत नाजुक
ब्लाक की बहादुरपुर लोहिया ग्राम पंचायत में बनी गोशाला में भी चार गोवंशों की हालत गंभीर है। यहां वर्तमान में 150 गोवंश हैं। यहां भी परौली रमायन गोशाला से शिफ्ट किए गए गोवंशों की हालत नाजुक है।
बताया जा रहा है कि जिस दिन से गोवंश यहां शिफ्ट किए गए हैं, गोवंशों के लिए भूसा का संकट है। प्रतिदिन भोर में गोवंशों को गोशाला से बाहर जंगल में चरने के लिए भेज दिया जाता है। देखने को तो गोशाला में गोदाम में 6 कुंतल भूसा है, लेकिन जब मीडिया की टीम वहां गई तो नादे खाली दिखाई दीं।
ऊसराहार गोशालाओं हो चुकी 10 गोवंशों की मौत
ऊसराहार। परौली रमायन की गोशाला से ताखा की गोशाला में शिफ्ट किए गए 58 गोवंशों में अब तक 10 गोवंशों की मौत हो चुकी है। गोशाला संचालकों ने गोवंशों की मौत पर पर्दा डालने के लिए सड़कों और खेतों में घूमने वाले गोवंश पकड़कर गिनती पूरी कर ली। इस व्यवस्था से गोशालाओं के संचालन पर सवाल उठ रहे हैं। बीते दो दिन में यहां छह गोवंशों की मौत हुई है।
परौली रमायन से ताखा में 58 गोवंशों को ताखा में शिफ्ट किया गया था। इसके लिए ताखा के मुरचा टांडेहार व ऊसराहार की गोशाला को चालू किया गया था। ऊसराहार में 30 और मुरचा में 18 गोवंश रखे गए थे।
एक सप्ताह में ऊसराहार की गोशाला में दो गोवंश की मौत हो चुकी है। अब यहां 28 शेष बचे हैं। मुरचा की गोशाला में अब तक आठ गोवंश मर चुके हैं। इस गोशाला में संख्या पूरी रखने के लिए आसपास घूमने वाले 11 गोवंश को पकड़कर गोशाला में रख दिया गया है।
इस तरह अब यहां पर संख्या 21 हो गई है। दो दिन पहले पांच गोवंशों की मौत हो गई। गोशाला कर्मी उपेंद्र ने बताया कि दो दिन पहले ही पांच गोवंशों की मौत हुई थी। उन्होंने गोवंशों के शव दफन कराए थे। 11 गोवंश बाहर से पकड़कर गोशाला के अंदर कर दिए गए हैं।
दो दिन से हो रही बारिश में मुरचा की गोशाला में जगह-जगह काफी पानी भर गया। इससे कीचड़ हो जाने के चलते गोवंश पानी में बैठने को मजबूर हैं।
क्षेत्र में अभी भी 19 गोशाला खाली पड़ी हैं। इस मामले में बीडीओ ताखा आशुतोष कुमार से बात करने की कोशिश की गई, लेकिन उनका फोन रिसीव नहीं हुआ।