फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

नई शिक्षा नीति में स्नातक में एक साल पढ़ने वालों को मिलेगा डिप्लोमा

विज्ञापन
फोटो संख्या 07- प्राचार्य डॉ आशुतोष मिश्रा - फोटो : ETAWAH
विज्ञापन
बकेवर। कानपुर विश्वविद्यालय से संबद्ध महाविद्यालयों में अब सेमेस्टर पद्धति से छात्र छात्राओं को पढ़ाया जाएगा। नई शिक्षा नीति में स्नातक स्तर पर एग्रीकल्चर, आर्ट, कॉमर्स, साइंस फैकल्टी में सेमेस्टर पद्धति को लागू किया गया है।
विज्ञापन

जुलाई 2020 को भारत सरकार ने नई शिक्षा नीति को लागू किया है। इसके अनुसार अब 10 + 2 + 3 के बजाय अब 8 +3+4 की शैक्षिक संरचना लागू होगी।
नए सत्र से नई शिक्षा नीति को लागू करते हुए चॉइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम को लागू कर दिया है। इस सिस्टम के तहत छात्र अपने मनपसंद विषयों का चुनाव कर सकता है। छात्रों को दो मुख्य विषय अपने संकाय से लेने होंगे।
एक मुख्य विषय वह अपने संकाय अथवा किसी अन्य संकाय से ले सकता है। एक माइनर विषय लेना होगा। एक कैरिकुलर विषय का चुनाव करना होगा।
व्यावसायिक दक्षता को बढ़ाने के लिए उन्हें किसी वोकेशनल कोर्स का चुनाव भी करना होगा। इस प्रकार छात्र प्रथम सेमेस्टर में छह विषय पढ़ेंगे। जिसमें से तीन मेजर और तीन माइनर होंगे।
विज्ञापन

नई शिक्षा नीति के तहत यदि छात्र स्नातक स्तर पर एक वर्ष का पाठ्यक्रम पूरा करता है तो उसे डिप्लोमा प्राप्त होगा। दो वर्ष की पढ़ाई करने पर उसे सर्टिफिकेट प्राप्त होगा। तीन वर्ष की पढ़ाई पूरी करने पर वह डिग्री प्राप्त करेगा। अभी तक छात्र यदि बीच के पढ़ाई छोड़ देता था तो उससे कुछ भी नहीं प्राप्त होता था।
सेमेस्टर सिस्टम का एक सकारात्मक पक्ष यह है कि छात्र पर अधिक पाठ्यक्रम का दबाव नहीं होगा एक सेमेस्टर में उसे निर्धारित विषय की थ्योरी और प्रैक्टिकल का अध्ययन करना होगा जो वार्षिक प्रणाली के मुकाबले कम होता है।
विषयों को पढ़ाने वाले कहां से आएंगे
बकेवर। नई संरचना लागू करने की कुछ व्यावहारिक समस्याएं भी हैं। जैसे कि कॉलेज में तीन विषयों को पढ़ाने के लिए ही निर्धारित संख्या में प्राध्यापक उपलब्ध नहीं है। अब बढे़ हुए माइनर विषयों को एवं वोकेशनल विषयों को पढ़ाने के लिए अध्यापक कहां से आएंगे। उनका खर्च कौन वहन करेगा। कॉलेज स्तर पर समय सारणी में बदलाव होगा और विभिन्न विषयों में तालमेल बनाना एक कठिन चुनौती होगी।
दो बार परीक्षाओं से अभिभावकों की जेब पर पड़ा बोझ
बकेवर। सेमेस्टर प्रणाली में परीक्षाएं वर्ष में दो बार होंगी। इसलिए यूनिवर्सिटी ने छात्रों का परीक्षा शुल्क बढ़ा दिया है। इससे छात्रों और अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ेगा। पहले स्नातक प्रथम वर्ष में छात्र को करीब बाइस सौ रुपये में प्रवेश मिला जाता था।
अब करीब पैंतीस सौ रुपये में प्रथम वर्ष हो रहा। नई शिक्षा नीति की सेमेस्टर प्रणाली से वर्ष में दो बार विश्वविद्यालय का परीक्षा शुल्क देने से अभिभावकों की जेब पर अतिरिक्त खर्च बढ़ेगा। कुछ अन्य शुल्क में भी विश्वविद्यालय ने यह वृद्धि की है तकरीबन वर्ष में एक छात्र को 12 सौ रुपये अतिरिक्त खर्च करने पड़ेंगे।
1. प्रति सेमेस्टर परीक्षा शुल्क 685 रुपये
2. बेब रजिस्ट्रेशन नंबर शुल्क 200 रुपये (पहले ये 50 रुपये लगता था)
3. नामांकन शुल्क 200 रुपये (पहले ये 100 रुपये था।)
4. स्किल डेवलपमेंट शुल्क 500 रुपये (पहले ये नही लगता था।)
5. स्नातक फाइनल वर्ष के प्रत्येक छात्र से 1000/ रुपये
(पहले 8 सौ रुपये सिर्फ उन छात्रों से लगता था जो विश्वविद्यालय से अपनी डिग्री निकलवाते थे। परंतु अब अंतिम वर्ष के सभी छात्र छात्राओं को जमा करना होगा।)
नई नीति होगी उपयोगी
जनता कॉलेज बकेवर की प्राचार्या डॉ नलिनी शुक्ला कहती हैं कि नई शिक्षा प्रणाली छात्रों के लिए उपयोगी साबित होगी। स्नातक की एक साल की पढ़ाई करने पर छात्र को डिप्लोमा मिल जाएगा। छात्र छात्राओं का स्किल डेवलपमेंट भी बोलकेशनल सब्जेक्ट से होगा। सेमेस्टर प्रणाली से दो बार परीक्षा देना अधिक बेहतर रहेगा।
उच्च शिक्षा में आएगा बदलाव
जनता कालेज के जंतु विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ ललित गुप्ता का कहना है ये नई शिक्षा प्रणाली से उच्च शिक्षा के स्तर में बदलाव आएगा। छात्र छात्राओं को स्नातक के साथ अतिरिक्त विषय से भी शिक्षा का ज्ञान होगा। इसके साथ ही स्नातक के मूल विषय के साथ अन्य दूसरे विषय की भी जानकारी रहेगी।
कामर्स आर्ट की एक साथ हो सकेगी पढ़ाई
इग्नू की काउंसलर प्रतिभा श्रीवास्तव कहती है कि नई शिक्षा प्रणाली छात्र छात्राओं के लिए बहुत लाभदायक होगी। अब विज्ञान, गणित व जीव विज्ञान से स्नातक करने वाला छात्र कॉमर्स व आर्ट विषय भी साथ पढ़ सकता है। इससे छात्र को अपने मूल विषय के साथ अन्य विषय की जानकारी होगी। परीक्षा भी साल में दो बार होने से छात्र छात्राएं पढ़ाई पर अधिक ध्यान देंगे। पाठ्यक्रम का लोड कम रहेगा।
नौकरी के हिसाब से उपयोगी होगी
राजबहादुर सिंह डिग्री कॉलेज के प्राचार्य डॉ आशुतोष मिश्रा कहते है ये थोड़ा जल्दबाजी है लेकिन ये प्रणाली छात्रों के जॉब के हिसाब से बहुत बेहतर ही है।

फोटो संख्या 08- प्रतिभा श्रीवास्तव- फोटो : ETAWAH

फोटो संख्या 09- डॉ ललित गुप्ता- फोटो : ETAWAH

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें