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जैन धर्म में तपस्या का है बहुत महत्व, चल रहा है निर्जल उपवास

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पंसारी टोला जैन मंदिर में सांस्कृतिक कार्यक्रम में नृत्य करती बालिका - फोटो : ETAWAH
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इटावा। पर्वाधिराज पर्यूषण महापर्व व दशलक्षण धर्म की आराधना लालपुरा स्थित श्री पारस नाथ दिगंबर जैन मंदिर में चल रही है। आचार्य प्रमुख सागर ने बताया उनके शिष्य मुनि श्री 108 प्रभाकर सागर का निर्जल उपवास चल रहा है, शनिवार को 9वां उपवास था।
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सोमवार को आहार होगा। बताया जैन धर्म में तपस्या का बहुत महत्व है। बताया पहली बार 10 दिन का निर्जल उपवास अपनी जन्मभूमि पर मुनि जी कर रहे हैं।
उनका जन्म इटावा में ही हुआ है। दशलक्षण महापर्व जैन धर्म में सबसे बड़ा पर्व है। 10 शिविरार्थी भी निर्जल उपवास कर रहे हैं। सुबह श्री जी का अभिषेक और पूजन हुआ।
प्रवचन के दौरान आचार्य ने अकिंचन धर्म के बारे में बताया उसका पालन घर में कर सकते हैं। कर्तापन का अभाव करके पोस्टमैन की तरह जिंदगी जियो। शरीर भी तुम्हारा नहीं है तो फिर मकान, दुकान, परिवार, बीबी, बच्चे तुम्हारे कैसे हो सकते हैं।
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आत्मा के अतिरिक्त ध्यान के अतिरिक्त मेरा कुछ भी नहीं है। मैं अकेला आया था जो शरीर मुझे यहां मिला उसे भी छोड़ कर जाना है। इसलिए हमेशा उत्तम अकिंचन धर्म भाव में अपना जीवन व्यतीत करें।
पंसारी टोला श्री पंचायती जैन मंदिर में महिला मंडल और बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। नृत्य में दीक्षा व कंचन ने प्रतिभाग किया। इस दौरान चातुर्मास कमेटी की पदाधिकारी और महिला मंडल उपस्थित रहीं।
अनंत चतुर्दशी पर लालपुरा जैन मंदिर में होंगे कार्यक्रम
आचार्य प्रमुख सागर के शिष्य क्षुल्लक प्रगुण सागर ने बताया 19 सितंबर को अनंत चतुर्दशी के मौके पर आचार्य के सानिध्य में सुबह अभिषेक व पूजन होगा। 11 बजे दीक्षार्थी का आहार किया जाएगा। इसके अलावा पूरे दिन और शाम को बच्चों के सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे। 20 सितंबर को दिन में 11 बजे आचार्य श्री दीक्षार्थी को दीक्षा प्रदान करेंगे।
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