इटावा। राजस्थान से चंबल नदी में आया पानी चंबल सेंच्युअरी में छोड़े गए घड़ियालों के बच्चों व मगरमच्छों के लिए काल बन गया। बाढ़ के दौरान इनके 90 फीसदी बच्चे चंबल से जुड़ी यमुना व क्वारी समेत अन्य नदियों में 100 किलोमीटर दूर तक बह गए।
कुछ भटककर क्षेत्र के तालाबों और पोखरों में पहुंच गए। उनके तो वापस लौटने की उम्मीद है लेकिन बाढ़ से आम लोगों के साथ इन वन्यजीवों को भी भारी नुकसान उठाना पड़ा है।
चंबल में घड़ियाल के बच्चों की प्रजनन क्षमता पिछले वर्ष की तुलना में डेढ़ गुना से अधिक बताई गई है। इनमें नर व मादा का अनुपात भी बराबर माना गया।
विभागीय सूत्रों के अनुसार इस साल खेड़ा अजब सिंह में घड़ियालों ने सबसे ज्यादा घोंसले (नेस्ट) रखे थे। इनसे निकले 1504 बच्चों को प्रकृति वास के लिए चंबल में दो महीने पहले छोड़ा गया था।
ये बच्चे पिछले साल की अपेक्षा अधिक स्वस्थ बताए गए थे। बीते दिनों चंबल में आई बाढ़ में 90 फीसदी से ज्यादा बच्चे पानी के तेज बहाव में बह गए और निगरानी में लगे चंबल सेंच्युअरी के कर्मचारी कुछ नहीं कर सके।
बाढ़ के दौरान यमुना नदी, पोखरों और तालाबों के किनारे मगरमच्छ देखे गए थे। इससे ग्रामीणों में दहशत का माहौल पैदा हो गया था। हालांकि बाद में मगरमच्छ तालाब, पोखर व यमुना नदी से वापस चले गए थे।
विभागीय जानकारों का मानना है कि यमुना व क्वारी समेत चंबल से जुड़ी अन्य नदियों से घड़ियाल लौटकर वापस चंबल में पहुंच जाएंगे। तालाब व पोखरों में बहकर पहुंचे घड़ियाल और मगरमच्छ पकड़ने के लिए कुंदौल व पसिया समेत आसपास के गांवों के प्रधानों से पानी साफ कराए जाने के लिए कहा गया है। इसके बाद चंबल सेंच्युअरी की टीम मगरमच्छ व घड़ियालों को पकड़कर चंबल नदी में छोड़ देगी।
मार्च से नेस्ट रखने का स्थान तलाश करने लगते हैं
विभागीय कर्मचारियों के मुताबिक फरवरी व मार्च महीने में घड़ियाल नर व मादा सहवास शुरू कर देते हैं। मार्च में मादा नेस्ट रखने का स्थान तलाश करने लगती हैं। मई के आखिरी और जून के पहले सप्ताह के बीच घड़ियाल के बच्चे अंडे से बाहर निकलने लगते हैं।
इसकी देखभाल मादा से ज्यादा नर घड़ियाल करता है। इनकी मृत्यु दर अधिक होती है। जीव-जंतु व डॉल्फिन मछली भी इन बच्चों को अपना शिकार बना लेती है। आखिर में पांच फीसदी बच्चे ही जीवित रहते हैं।
चंबल नदी में चार हजार घड़ियाल और 920 मगरमच्छ के अलावा बड़ी संख्या में डॉल्फिन मछलियां थीं। बाढ़ के बाद घड़ियाल और मगरमच्छ के बच्चे कितने जीवित बचे हैं, यह दिसंबर, जनवरी माह में गणना के बाद ही साफ हो सकेगा। उस दौरान मगरमच्छ व घड़ियाल धूप सेंकने के लिए पानी के ऊपर आते हैं। हालांकि बाढ़ में घड़ियाल व मगरमच्छ के बच्चों को नुकसान होने की बात से इनकार नहीं किया जा सकता है। - दिवाकर श्रीवास्तव, डिप्टी डायरेक्टर, चंबल सेंच्युअरी, इटावा