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दो महीने से एमआरआई व सीटी स्कैन मशीन पड़ी बेकार, लौटाए जा रहे मरीज

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खराब पड़ी एमआरआई मशीन - फोटो : ETAWAH
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सैफई। प्रदेश के सबसे बड़ी ग्रामीण मेडिकल यूनिवर्सिटी सैफई की एमआरआई और सीटी स्कैन मशीन दो महीने से खराब पड़ी है। मरीजों को एमआरआई व सीटी स्कैन की जांच बाहर महंगे दामों पर करानी पड़ रही है। वहीं मशीन खराब होने की शिकायत करने पर यूनिवर्सिटी प्रशासन मरीजों को जांच जल्द उन्हें ठीक कराने का भरोसा देकर लौटा रहा है।
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मेडिकल यूनिवर्सिटी में वर्ष 2007 में सीटी स्कैन व एमआरआई मशीन मरीजों की जांच के लिए मंगाई गई थी। एमआरआई और सीटी स्कैन मशीन को यूनिवर्सिटी के इमरजेंसी ट्रामा सेंटर में स्थापित किया गया था।
दो महीने पहले ये मशीनें खराब हो गईं। यूनिवर्सिटी में बीमार और हादसे में घायल लोगों को डॉक्टर सीटी स्कैन व एमआरआई जांच के लिए भेजते हैं। जब तीमारदार मरीज को लेकर वहां पहुंचते है, तो बाहर चस्पा मशीन खराब होने का नोटिस पढ़कर लौट आते हैं।
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इसके बाद तीमारदार यूनिवर्सिटी के अफसरों से शिकायत करने जाते हैं, तो उन लोगों को यह कहकर लौटा दिया जाता है कि दो-चार दिन में मशीन ठीक हो जाएगी। तब जांच हो पाएगी।
इसके बाद तीमारदार गंभीर व हादसे में घायल मरीजों की दो या तीन गुना दाम पर निजी पैथोलॉजी में जांच कराने को मजबूर हैं। यूनिवर्सिटी की सीटी व एमआरआई मशीन खराब होने से मरीजों व तीमारदारों में नाराजगी है।
उनका आरोप है कि मशीनों की मरम्मत कराने या नई मशीनें लगवाने में प्रशासन जानबूझ कर देरी कर रहा है। ताकि निजी पैथोलॉजी वालों ने सीटी स्कैन व एमआरआई के लिए भेजे जाने के एवज में कमीशन मिलता रहे।
प्रमुख सचिव को भी है जानकारी
प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा आलोक कुमार जुलाई माह में मेडिकल यूनिवर्सिटी का दौरा करने आए थे। उस समय मशीनें खराब होने का मुद्दा उठा था। तब प्रमुख सचिव ने कहा था कि मशीनें पुरानी हो गई हैं। जल्द ही नई मशीनें लगाई जाएंगी। इस बारे में यूनिवर्सिटी के अफसरों को निर्देशित कर दिया गया है। इसके बाद भी अभी तक नई मशीनें नहीं लगी हैं और मरीज सीटी स्कैन व एमआरआई की जांच कराने के निजी पैथोलॉजी में जाने को मजबूर हैं।
आए दिन विश्वविद्यालय में कोई न कोई नहीं कमी सामने आती रहती है। लगभग दो माह से सीटी स्कैन व एमआरआई मशीन खराब है, लेकिन यूनिवर्सिटी प्रशासन हाथ पर हाथ रखकर बैठा हुआ है। दोनों मशीनों को जल्द ठीक कराया जाया या नई मशीनें लगाई जाए। ताकि मरीजों को सहूलियत हो सके। - संतोष शाक्य, सपा ब्लॉक अध्यक्ष सैफई
जालौन से एक्सीडेंट में घायल को सैफई मेडिकल यूनिवर्सिटी लाया गया था। यहां सीटी स्कैन मशीन सही न होने के कारण उसे भर्ती नहीं किया गया था। बाद में मरीज का आगरा में इलाज कराया गया था। - सुरेंद्र सिंह, जिला संरक्षक भारतीय किसान यूनियन
कुलसचिव का बयान
वर्ष 2007 में सीटी स्कैन व एमआरआई मशीन लगाई गई थी। इन मशीनों की पांच व 10 साल की वारंटी थी। दोनों की मियाद खत्म हो चुकी है। दोनों मशीन कंडम हो गई हैं। एक टेक्नीशियन से मशीनों को सही कराने का प्रयास किया गया, लेकिन सफलता नहीं मिली। यूनिवर्सिटी प्रशासन की तरफ से शासन को नई एमआरआई व सीटी स्कैन मशीन के लिए पत्र भेजा गया है। सीटी स्कैन मशीन लगभग 10 करोड़ व एमआरआई मशीन लगभग 13 करोड़ की आती है। - सुरेश चंद्र शर्मा, कुलसचिव, सैफई मेडिकल यूनिवर्सिटी

बेकार पड़ी सीटी स्कैन मशीन- फोटो : ETAWAH

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