जिला अस्पताल में पर्चा बनवाने को लाइन में लगी महिलाएं
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इटावा। डेंगू का कहर थम नहीं रहा है। बुधवार को जिले में पांच नए डेंगू के मरीज मिले हैं। इनमें दो का जिला अस्पताल व दो का सैफई मेडिकल यूनिवर्सिटी में इलाज हो रहा है। इसके अलावा निजी अस्पतालों में भर्ती बुखार से पीड़ित 26 लोगों का ब्लड जांच के लिए सैंपल सैफई मेडिकल यूनिवर्सिटी व निजी पैथोलॉजी में जांच के लिए भेजा गया है।
डिप्टी सीएमओ डॉ.अवधेश यादव ने बताया कि बुधवार को जिले में बुखार से पीड़ित 902 मरीज इलाज के लिए डॉ. बीआर आंबेडकर जिला चिकित्सालय व अन्य सरकारी अस्पतालों में पहुंचे। इनमें 205 लोगों का रैपिड टेस्ट कराया गया तो 19 लोग डेंगू के संदिग्ध पाए गए। इन सभी का सैफई मेडिकल यूनिवर्सिटी में एलाइजा टेस्ट कराया गया तो तीन रोगियों की जांच रिपोर्ट डेंगू पॉजिटिव निकली। इनमें दो को जिला अस्पताल में भर्ती किया गया है। इसके अलावा जिले के निजी अस्पतालों में भर्ती बुखार के 26 मरीजों का एलाइजा टेस्ट कराने के लिए सैंपल सैफई मेडिकल यूनिवर्सिटी व निजी पैथोलॉजी में भेजा गया है। डिप्टी सीएमओ के मुताबिक अस्पतालों में बुखार व अन्य संक्रामक बीमारियों के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। डेंगू के भी नए मामले लगातार सामने आ रहे हैं।
उधर, सैफई मेडिकल यूनिवर्सिटी में भी डेंगू के दो नए मामले सामने आए हैं। दोनों का यूनिवर्सिटी में भर्ती किया गया है। यूनिवर्सिटी प्रशासन के मुताबिक अभी तक डेंगू के जिले के 10 मरीजों को अस्पताल में भर्ती किया गया। इनमें से दो ठीक हुई। वहीं, बुधवार को दो नए मरीज आए, तो संख्या फिर 10 पहुंच गई। इसके अलावा यूनिवर्सिटी डेंगू से पीड़ित औरैया, फर्रुखाबाद, मैनपुरी के दो-दो मरीज भर्ती हैं। यूनिवर्सिटी प्रशासन के मुताबिक ओपीडी व इमरजेंसी में आने वाले मरीजों में वॉयरल बुखार के केस बहुतायत संख्या में आ रहे हैं।
अस्पताल में जमीन पर कराहती रही बच्ची
तमाम कवायद के बाद भी सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था में सुधार नहीं हो रहा है। बुधवार को तेज बुखार से कराह रही सात साल की सीता को परिजन अस्पताल लेकर पहुंचे। परिजनों के मिन्नतें करने के बाद भी कर्मचारी बच्ची को अस्पताल के भीतर नहीं ले गए। इस पर मां बच्ची को अस्पताल परिसर में ही जमीन पर लिटा कर पर्चा बनवाने चली गई। इस दौरान बच्ची अकेली जमीन पर पड़ी कराहती रही। औरैया निवासी हरिओम की भतीजी सीता को कई दिनों से बुखार आ रहा था। बुधवार को सीता मां और चाचा हरिओम के साथ बसरेहर एक रिश्तेदार के घर जा रही थी। रास्ते में उसकी हालत बिगड़ गई। बुखार तेज होने पर चाचा व मां सीता को लेकर जिला अस्पताल पहुंचे। वहां मां ने कर्मचारियों से बेटी को अस्पताल के भीतर ले चलने को कहा। डॉक्टरों से बेटी का इलाज करने की मिन्नतें की, लेकिन किसी नहीं उनकी नहीं सुनी। इसके बाद मां अस्पताल में ही बेटी को जमीन पर लिटा कर पर्चा बनवाने के लिए काउंटर पर चली गई।