चकरनगर। चंबल और यमुना के जलस्तर में पिछले 24 घंटों में गिरावट ने इस विभीषिका से जूझ रहे प्रभावितों को आंशिक राहत प्रदान की है। पानी का स्तर कम होने के बाद अब समस्याओं की बाढ़ उफान पर है।
बाढ़ के कहर से ग्रामीण खून के आंसू रो रहे हैं। पानी में डूबे घर दरक रहे हैं। चारों तरफ कीचड़ गंदगी का अंबार लगा हुआ है। 45 गांवों का संपर्क मुख्यालय से कटा हुआ है। इन गांवों में बिजली आपूर्ति ठप है।
बीमार लोगों तक स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं पहुंच पा रही हैं। खाने पीने के इंतजाम नाकाफी हैं। प्रशासनिक मशीनरी राहत एवं बचाव कार्य में लगी है। एनडीआरएफ ने शनिवार को भी बाढ़ ग्रस्त इलाकों से महिलाओं, बच्चों और पुरुषों का रेस्क्यू कर उन्हें सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया।
एसडीएम, तहसीलदार व राजस्व कर्मचारियों की अस्थाई तैनाती भी की गई हैं लेकिन परेशानियों और दुश्वारियों के बीच में फंसे ग्रामीण प्रशासन की सुविधाओं से खुश नहीं है।
चंबल का जलस्तर पिछले 24 घंटों में करीब 2 मीटर घट गया है। केंद्रीय जल आयोग उदी स्थान के प्रभारी शहजादे खां ने बताया कि 6 अगस्त को दोपहर एक बजे सर्वाधिक जलस्तर 128.51 रिकार्ड किया गया था।
इसके बाद पानी घटने की शुरूआत हुई। शनिवार शाम 5 बजे जलस्तर घटकर 126.04 पर आ गया। अभी भी चंबल खतरे के निशान 121 मीटर से छह मीटर ऊपर बह रही है।
एसडीएम चकरनगर सत्यप्रकाश ने बताया कि बाढ़ प्रभावितों के खाने पीने की कोई समस्या नहीं होने दी जाएगी। पानी कम होने से खतरा कम हुआ है। बाढ़ ग्रस्त क्षेत्र में सभी कर्मचारी तैनात है हालात में काबू पाया जा रहा है।