निवाड़ीकला। चुनाव नजदीक आते ही प्रत्याशियों ने जनसंपर्क और प्रचार में ताकत झोंक दी है। घर-घर संपर्क में उनकी जुबान पर एक ही बात रहती है कि अम्मा, काका, काकी, चाची अबकी हमई को वोट दियो। प्रत्याशी और उनके समर्थक टोलियों में बंटकर चुनाव प्रचार में जुटे है।
गांवों में घुसते ही प्रत्याशी और समर्थक बुजुर्गों के पैर छूकर आशीर्वाद मांगकर उन्हीं की भाषा में बोलचाल का प्रयास करते हैं। प्रत्याशी लोगों को अपनी बात बड़ी शिद्दत से समझाते है और मतदाताओं का रुख भांपने की कोशिश करते है। कोई कहता है कि मेरी सरकार ने इतने काम करवाए तो कोई कहता कि जीतने के बाद हम विकास की गंगा बहा देंगे। दिलचस्प बात तो यह है कि प्रत्याशी और उनके समर्थक चुनाव प्रचार में उतने मशगूल हो गये हैं कि वह अपने से उम्र में छोटे लोगों के तपाक से पैर छूने से नहीं चूक रहे हैं। बुजुर्ग राम सनेही बताते हैं कि पहले चुनावों में पैर छुआई तो खूब होती थी लेकिन उम्र का ध्यान रखा जाता था। उम्र से बड़े के पैर छूने, बराबर वालों से हाथ मिलाने और छोटों से नमस्ते की प्रथा थी लेकिन अब छोटा हो या बड़ा पैर सभी के छुए जाने लगे।