इटावा/लवेदी/बकेवर। मौसम का मिजाज नित नया रूप ले रहा है। कभी बादल तो कभी धूप के बाद फिर बूंदाबांदी। सोमवार को बूंदाबांदी होती रही। बारिश की वजह से सोमवार को रविवार की अपेक्षा न्यूनतम तापमान तीन डिग्री और अधिकतम तापमान में दो डिग्री की गिरावट देखने को मिली।
सुबह हल्की बारिश के बाद दिनभर सूर्य देव के दर्शन नहीं हुए। उधर बारिश आलू और सरसों की फसल के लिए कहर साबित हो रही है। लगातार बारिश होने से किसान परेशान हैं। खेतों में बोई गई फसल तो बर्बाद हो ही रही है, लेकिन भविष्य का भी कुछ पता नहीं।
उधर, बारिश और ठंड के जारी रहने से लखना नगर पंचायत ने सार्वजनिक स्थानों पर अलाव जलवाए जाने से लोगों को राहत मिल रही है। हालांकि, कस्बा तिराहे, कालिका मंदिर, सब्जी मंडी व अन्य मोहल्लों में अलाव के लिए डाली गई लकड़ी बारिश से भीग चुकी है।
सर्दी से बचने के लिए लोग बाजार से कोयला खरीदकर लाकर घर में आग जला रहे हैं। इस वजह से कोयला के दामों में 20 रुपये की बढ़ोतरी हो गई है। पूर्व में 20 रुपये किलो में बिकने वाला कोयला अब 40 रुपये किलो बिक रहा है।
बेरीखेड़ा रोड स्थित कोयला विक्रेता बंटी खां ने बताया कि बारिश के चलते लकड़ी भीगने की वजह से कोयला की मांग बढ़ गई है। लोग घरों में आग जलाने व भट्ठी पर खाना बनाने के लिए कोयला खरीदार कर ले जा रहे हैं।
बात बिजली की हीटरों की करें तो 100 रुपये में मिलने वाला सादा प्लेट वाला हीटर अब 150 रुपये में मिल रहा है। एलीमेंट के दाम भी दस रुपये बढ़ गए हैं। 25 रुपये में मिलने वाले एलीमेंट 35 रुपये में मिल रहा है।
सर्दी बढ़ने से रूम हीटरों की बिक्री भी बढ़ गई है। वहीं, बकेवर क्षेत्र में बेमौसम बारिश का दौर सोमवार को जारी रहने से सरसों और आलू पैदा करने वाले किसानों की चिंताएं दूर होने का नाम नहीं ले रही हैं। बारिश से फसल खेतों में गिर गई है।
इस वजह से फसल में फफूंदी लगने व सड़ने की आशंका बढ़ गई है। किसान दयाशंकर, राजू चतुर्वेदी, अनुरुद्ध चतुर्वेदी का कहना है कि सरसों और आलू के साथ-साथ अब गेहूं की फसलों में भी नुकसान की आशंका सता रही है।
गेहूं के जिस खेत में हाल ही में पानी लगाया गया था, उन खेतों में पानी की नमी सूखने के पहले ही बारिश होने से खेतों में पानी भरा दिखने लगा है। अधिक समय तक मौसम न खुलने और खेत में पानी भरा रहने से गेहूं की फसल में पीलापन आ जाएगा।
कहा कि जिन गेहूं के खेतों की फसल 30 से 40 दिन के बीच की हो गई है, उनमें पानी लगने के बावजूद किसान उन्हें खाद व खरपतवार की दवाई नहीं डाल पा रहे हैं। अधिक नमी के चलते खाद व खरपतवार की दवाई किसान खेतों में नहीं डाल पा रहे हैं।
ठंड से सरसों की फसल पर भी आफत
चकरनगर। बारिश से ठंड बढ़ गई है। ठंड से सरसों की फली के भी पूरा रूप नहीं ले पाने की आशंका सता रही है। इस समय सरसों के लिए खुली धूप की जरूरत थी।
किसान कन्हैयालाल, जयकुमार, लालमन सिंह, रामस्वरूप, गेंदालाल ने कहा कि मौसम बिगड़ने से सरसों की फसल को नुकसान है। सरसों की फसल खेतों में बारिश और तेज हवा से पलट गई है।
फलियों और फूल को हवा व भूप न मिलने से बेकार हो जाएगी। किसानों का कहना है कि अच्छा मुनाफे की उम्मीद थी, लेकिन बेमौसम बरसात ने पानी फेर दिया है। अगर मौसम खुलता है तो कुछ उम्मीद है, वरना सरसों में घाटा होने वाला है।
हवा संग बारिश होने से शीतलहर के चलते लोग घरों में कैद होकर रह गए हैं। सोमवार को रिमझिम बरसात से सर्दी और बढ़ गई है।
दलहनी और तिलहनी फसलें हो गईं बर्बाद
महेवा। लगातार पांचवें दिन बूंदाबांदी का दौर जारी रहने से आम जनमानस बेहाल है। किसानों के लिए बारिश अब मुसीबत साबित हो रही है। बारिश की वजह से दलहनी और तिलहनी की फसलें बर्बादी की कगार पर पहुंच गई हैं।
बारिश से गेहूं को आंशिक तो अन्य फसलें चना, मटर, मसूर, अरहर को भारी नुकसान पहुंचा है। खेतों में पानी भरने से आलू के पौधों में सड़ने और रोग लगने की संभावना भी गहरा गई है।
आलू की फसल में नुकसान देखकर आलू किसानों के होश उड़े हुए हैं। एडीओएजी राजेश चतुर्वेदी ने बताया कि आगामी तीन दिनों में विकास खंड के कुछ स्थानों पर बादलों के साथ बूंदाबांदी होने की संभावना है।
हालांकि, बीच-बीच धूप में धूप खिलती रहेगी। 12 जनवरी से मौसम साफ होने की संभावना है।
फसल बीमा का लाभ प्रभावित किसानों को मिलेगा
जनपद में सात से 10 जनवरी तक हुई असमय बारिश और ओलावृष्टि से रबी सीजन में आलू, सरसों, गेहूं में हुई क्षतिपूर्ति के लिए किसान फसल बीमा योजना के तहत अपना दावा कर सकते हैं।
जिला कृषि अधिकारी अभिनंदन सिंह ने बताया कि जिनका बैंक एवं जनसेवा केंद्र से फसल बीमा हुआ है, वे प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत बीमा कंपनी के टोल फ्री नंबर-18008896868, 18002005142 पर अपना दावा दर्ज करा सकते हैं।
जिससे उनको क्षतिपूर्ति मिल सके। बताया कि इसके लिए ब्लाक स्तर पर नियुक्त बीमा प्रतिनिधि से संपर्क कर शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
इसके अलावा सहायक विकास अधिकारी कृषि या कार्यालय जिला कृषि अधिकारी इटावा में लिखित प्रार्थनापत्र देकर फसल नुकसान का तत्काल सर्वे करा सकते हैं, जिससे फसल क्षतिपूर्ति का निर्धारण हो सके।