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अपहरण के मामले में अदालत ने सुनाई आजीवन कारावास की सजा

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इटावा। कोर्ट ने गुरुवार को अपहरण मामले में दोषी आजीवन कारावास व एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। न्यायाधीश ने दोषी का कोरोना टेस्ट कराने एवं टेस्ट रिपोर्ट आने तक उसे बंदियों से पृथक रखने के आदेश दिए हैं। वहीं तीन आरोपियों को बरी कर दिया गया है।
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शिवा कालोनी रामनगर निवासी बृजेंद्र सिंह ने थाना सिविल लाइन पुलिस को सूचना दी 21 सितंबर 2009 को दिन के साढ़े 11 बजे उनका नाती आशीष तोमर क्लीनिक पर दवा लेने गया था। काफी समय तक वह वापस नहीं आया तो उसकी तलाश की गई। जानकारी करने पर पता चला के सुबह 9 बजे देवराज निवासी नगला तौर बलरई का फोन आया था। उसने ही आशीष को बुलाया है। उनके प्रार्थनापत्र पर थाना सिविल लाइन पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज नहीं की। इस पर उन्होंने एसएसपी को प्रार्थनापत्र दिया। एसएसपी के आदेश पर 24 सितंबर को थाना सिविल लाइन मे देवराज पुत्र रविंद्र सिंह निवासी नगला तौर, मनीष शर्मा निवासी विजयपुरा, किशनपाल निवासी विजयपुरा, मनीष तिवारी निवासी परमधाम के खिलाफ अपहरण की धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई। पुलिस ने 27 सिंतबर को विधीपुरा के बीहड़ से अपह्त आशीष को मुक्त कर लिया। विवेचना के उपरांत आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया। मामले की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या 8 डॉ. विजय कुमार की अदालत में हुई। राज्य की ओर से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता देवेंद्र तिवारी ने पैरवी की।
शासकीय अधिवक्ता देवेंद्र तिवारी ने बताया के दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद न्यायाधीश ने देवराज को दोषी पाते हुए आजीवन कारावास एवं एक लाख रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। बाकी तीन अन्य आरोपियों को दोषमुक्त करते हुए बरी कर दिया।
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