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डेंगू से संविदाकर्मी की अलीगढ़ में हुई मौत

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इटावा। वायरल बुखार और डेंगू का प्रकोप जनपद में कम होने का नाम नहीं ले रहा है। रोजाना कहीं न कहीं से बुखार से ग्रसित किसी बीमार व्यक्ति की मृत्यु हो रही है।
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जसवंतनगर थाना क्षेत्र के कोकावली निवासी एक संविदा कर्मचारी की अलीगढ़ में इलाज के दौरान मौत हो गई। कर्मी की मौत की सूचना पर परिवार में कोहराम मच गया। संविदा कर्मी अलीगढ़ के इंगलास तहसील में संविदाकर्मी के पद पर तैनात थे।
मिली जानकारी के अनुसार, जसवंतनगर क्षेत्र के ग्राम कोकावली निवासी महेंद्र सिंह के पुत्र विकास बाबू (36) की डेंगू से अलीगढ़ के मेडिकल कालेज में इलाज के दौरान मृत्यु हो गई।
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परिवारीजनों के अनुसार, विकास बाबू जनपद अलीगढ़ की तहसील इंगलास में कंप्यूटर ऑपरेटर पद पर संविदा कर्मी के रूप में कार्यरत थे। उन्हें तीन दिन से बुखार आने की वजह से अलीगढ़ मेडिकल कालेज में भर्ती कराया गया।
मेडिकल कॉलेज में डाक्टरों ने डेंगू की पुष्टि की थी। विकास बाबू की शनिवार देर रात अलीगढ़ में मृत्यु हो गई। वह अपने पीछे दो पुत्र छोड़ गए हैं। उधर, रविवार का अवकाश होने की वजह से जिला अस्पताल की इमरजेंसी में बुखार के करीब 60 मरीज आए।
पैथोलॉजी लैब के वरिष्ठ तकनीशियन एके दुबे ने बताया कि सभी की खून की जांच हुई। इसके अलावा रैपिड किट से हुई डेंगू की जांच में आठ मरीज मिले, जबकि 21 सैंपल डेंगू की कंफर्म एलाइजा जांच के लिए सैफई चिकित्सा विश्वविद्यालय भेजे गए हैं।
उधर, उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विवि सैफई में रविवार को बुखार के दो मरीज आए, जबकि डेंगू के 3 नए मरीज भर्ती किए गए। चिकित्सा अधीक्षक प्रो. डा. आदेश कुमार ने बताया कि रविवार को डेंगू के एक मरीज की छुट्टी की गई, जबकि डेंगू के 66 मरीज भर्ती हैं।
इटावा के डेंगू के 3 मरीज भर्ती हुए। इस समय इटावा के 35 डेंगू के मरीज भर्ती हैं। इसके अलावा औरैया, फिरोजाबाद, मैनपुरी, एटा, समेत आसपास के कई जिलों के मरीज भर्ती हैं, लेकिन मलेरिया ग्रसित कोई मरीज नहीं है।
ग्रामीण क्षेत्रों में झोलाछाप कर रहे इलाज
बकेवर। लखना, बकेवर सहित ग्रामीण क्षेत्र में झोलाछाप की मनमानियों से इलाके में डेंगू, वायरल जैसे सीजनल बुखार बेकाबू हो रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्र में बीमार लोग सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर उपचार लेने के बजाय झोलाछाप के यहां पहुंच रहे हैं।
महेवा ब्लॉक में दो दर्जन से अधिक गांव बीमारियों की चपेट में है। ब्लॉक में अपंजीकृत क्लीनिकों की संख्या दर्जनों में है। जहां पर वायरल फीवर, डेंगू से बीमार मरीजों की तादात खासी है।
अपंजीकृत क्लीनिकों में मरीजों को भर्ती करने के लिए जगह नहीं है। मरीज क्लीनिक में एक बैंच पर दो से तीन, जरूरत पड़ने पर घर से चारपाई लेकर जा रहे हैं। गांव के लोग बुखार, डेंगू का उपचार कराने के लिए सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर नहीं पहुंच रहे हैं।
सीएचसी प्रभारी महेवा गौरव त्रिपाठी ने बताया कि सरकारी अस्पतालों में उपचार की पूरी व्यवस्था है। बेड और दवाएं उपलब्ध है। टीमें गांव-गांव जाकर उपचार कर रही है।
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उसके बाद भी बीमार लोग झोलाछाप के यहां इलाज के लिए जा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग शिकायत मिलने पर लगातार झोलाछाप पर कार्रवाई कर रहा है।
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