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किसी न कहा, बजट विकास परक तो कोई बोला-निराशाजनक

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इटावा। आम बजट पर कुछ लोगों ने कहा है कि सभी का ध्यान रखा गया। बजट चुनावी और लोक लुभावन न होकर भविष्य के लिए विकास केंद्रित हैं। इससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। जीएसटी कम करने से राहत मिलेगी। कस्टम ड्यूटी कम करने से हीरे की ज्वैलरी सस्ती होगी। वहीं कुछ लोगों ने बजट को निराशाजनक बताया है। इन लोगों का कहना है कि बजट में शिक्षक, कर्मचारी और महिलाओं के लिए कुछ खास नहीं है। कारोबारियों को भी कुछ नहीं मिला।
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सेवानिवृत्त प्रोफेसर आरके अग्रवाल ने कहा कि बजट सर्वमुखी विकास की ओर अग्रसर है। बजट में महिलाओं, गरीबों व किसानों का ध्यान रखा गया है। एमएसमी (स्मॉल एंड मिडिल) उद्यमियों पर जोर दिया गया है। यह रोजगार परक होगा। बजट में स्टार्टअप, कौशल विकास पर बल दिया है। उम्मीद थी इनकम टैक्स में छूट मिलेगी लेकिन नहीं मिली। इसकी आवश्यकता नहीं थी, क्योंकि विकास के लिए भी पैसा चाहिए। जीएसटी कम करने से राहत मिलेगी।
केके महाविद्यालय की अर्थशास्त्र की प्रवक्ता डॉ. पद्मा त्रिपाठी का कहना है कि यह बजट लोक लुभावन और चुनावी नहीं, बल्कि भविष्य के लिए विकास केंद्रित है। पूंजीगत निवेश 35 प्रतिशत बढ़ाने से रोजगार सृजन होगा। 60 लाख लोगों को अतिरिक्त रोजगार सृजन व तीन साल में 400 नई वंदे मातरम ट्रेनों का विकास सफर सस्ता करेगा। महिलाओं के उपभोग की वस्तुएं सस्ती करके उन्हें भी खुश किया है।
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उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल उत्तर प्रदेश के जिलाध्यक्ष आलोक दीक्षित का कहना है आम बजट व्यापारी एवं किसान विरोधी और पूंजीवादी समर्थक है। निजीकरण, तेल के दाम में भारी बढ़त से पहले से परेशान हैं। जीएसटी और इनकम टैक्स छूट की सीमा बढ़ाई जानी चाहिए थी। हम लोग उम्मीद कर रहे थे कि सरकार कारोबार बढ़ाने के लिए कारोबारियों को ब्याज मुक्त ऋण देने जैसी घोषणा करेगी।
इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन इब्जा के प्रदेश सह प्रभारी आकाशदीप जैन ने कहा सरकार ने घरेलू उत्पाद को बढ़ावा देने और निर्यात को गति देने के लिए कुछ अच्छे कदम उठाए हैं। सोना कारोबारियों को इससे ज्यादा की मांग थी। पॉलिस हीरे पर कस्टम ड्यूटी घटाने से हीरे से जुड़ी ज्वैलरी सस्ती होगी, लेकिन जीएसटी दरें भी घटाई जानी चाहिए थीं। वर्तमान में सोने और ज्वैलरी पर तीन फीसदी जीएसटी लगती है।
राजागंज चौराहा निवासिनी गृहिणी रेशू जैन का कहना है महिला वित्त मंत्री होने के नाते उम्मीद थी कि कम से कम रसोई पर नियंत्रण जैसी घोषणा होगी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। रसोई गैस के अलावा खाद्य पदार्थ के दाम आसमान छू रहे हैं। इससे किचन का बजट गड़बड़ा गया है। घरेलू बजट और किचन के बजट पर सरकार को नियंत्रण करना चाहिए। इसे सस्ता किए जाने की जरूरत है।
शिक्षक उपेंद्र कुमार वर्मा का कहना है इस बार केंद्रीय बजट में पुरानी पेंशन बहाली एवं आठ लाख तक की आय को कर मुक्त करने की उम्मीद थी। ऐसा न होने से शिक्षक व कर्मचारियों में निराशा है। कहा हम शिक्षक व कर्मचारियों को पुरानी पेंशन से कम कुछ भी मंजूर नहीं है। सरकार को शिक्षक कर्मचारियों की भावनाओं का इस बार के बजट में ख्याल रखना था।
पंजाबी कालोनी निवासी समाजसेवी सतनाम अरोरा का कहना है मोदी सरकार ने जिस तरह से सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास का नारा दिया है, बजट में उसकी झलक नहीं दिखाई दी। बजट में महंगाई कम करने जैसी कोई बात नजर नहीं आती। वित्तमंत्री को इस ओर देखना चाहिए था।
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