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आयोग को नहीं मिला चुनाव में खर्च का ब्योरा

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इटावा। त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों के बाद ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत सदस्य और जिला पंचायत सदस्यों का शपथ ग्रहण भी हो चुका है। इसके बाद भी अभी तक एक भी प्रत्याशी ने आयोग को चुनाव में खर्च हुई रकम का ब्योरा नहीं दिया है। निर्वाचन आयोग के नियमानुसार चुनाव में खर्च रकम का लेखाजोखा जमा न करने वाले प्रत्याशियों की जमानत राशि भी वापस नहीं होगी।
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जिले में पंचायत चुनावों के लिए 19 अप्रैल को मतदान कराया गया। दो मई को मतगणना हुई। इसके बाद अब ग्राम पंचायतों, क्षेत्र पंचायतों और जिला पंचायतों का गठन भी हो चुका है। चुनाव होने के तीन महीने बाद तक का समय प्रत्याशियों को चुनाव खर्च जमा कराना होता है।
ग्राम प्रधान, सदस्य और क्षेत्र पंचायत सदस्य अपना खर्चा संबंधित तहसील पर और जिला पंचायत सदस्य अपना चुनावी खर्च कोषाधिकारी के पास जमा करते हैं। राज्य निर्वाचन आयोग ने सभी पदों के लिए चुुनावी खर्च की सीमा तय कर दी है। जिसके अनुसार ग्राम प्रधान और क्षेत्र पंचायत सदस्य को 75- 75 हजार, जिला पंचायत सदस्य को 150000 और ग्राम पंचायत सदस्यों केे 10000 रुपये खर्च करने का अधिकार होता है।
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जिले में 8 क्षेत्र पंचायतें, 471 ग्राम पंचायतें हैं। इनमें ग्राम प्रधान के 471 पदों पर 4076, बीडीसी के 582 पदों पर 2156 और जिला पंचायत सदस्य की 24 सीटों पर 220 प्रत्याशियों ने चुनाव लड़ा। ग्राम पंचायत सदस्य के 5903 पदों पर करीब 6000 उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा। इस प्रकार इन सभी पदों पर लाखों रुपये की धनराशि बतौर राजकीय कोष में जमा कराई गई। यदि प्रत्याशी चुनावी खर्च जमा कर देते हैं तो उनकी जमानत राशि वापस हो सकती है। परंतु चुुनाव होने के बाद अब कोई खर्च का ब्योरा करने के झंझट में नहीं पड़ना चाहता।
प्रधान पद
अनारिक्षत- 2000
आरक्षित- 1000
बीडीसी
अनारक्षित- 2000
आरक्षित- 1000
जिला पंचायत सदस्य
अनारक्षित- 2000
आरक्षित- 1000
ग्राम पंचायत सदस्य
अनारक्षित- 500
आरक्षित- 250
सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी उदयनारायण ने बताया कि अभी तक किसी प्रत्याशी ने चुनाव में किए गए खर्च का ब्योरा जमा नहीं कराया है। न ही किसी ने जमानत राशि वापस लेने के लिए ही आवेदन किया है। समय सीमा के अंदर खर्च का ब्योरा जमा करने वाले प्रत्याशियों की जमानत राशि जब्त कर ली जाएगी।
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