चकरनगर। इस वक्त चंबल किनारे दो दर्जन से ज्यादा दुर्लभ प्रजातियों के विदेशी पक्षियों का डेरा लगा हुआ है। इससे चंबल सेंक्चुअरी की सुंदरता को चार चांद लग गए हैं। पक्षियों के साथ ही जलीय जीवों की अठखेलियां लोगों को आकर्षित कर रही हैं।
टेल टिंगो, प्लेसिस गल, ब्लैक नेंड स्टार्ड, ब्लैक आइविस, विसलिंग टील, रूडी शेल्डक, पेंटेड स्टोर्क, कार्बोनेट, बारहेडेड समेत दो दर्जन से अधिक प्रजातियों के करीब पांच हजार विदेशी पक्षी चंबल किनारे डेरा डाले हुए हैं। रूस के साइबेरिया आदि क्षेत्रों में बर्फ गिरने के बाद ये पक्षी भोजन और प्रजनन के लिए हजारों किलोमीटर की उड़ान भरकर नवंबर माह में चंबल नदी के किनारे आना शुरू हो जाते हैं। नदी किनारे अनुकूल वातावरण के चलते ये पक्षी फरवरी के आखिरी सप्ताह तक यहां रहते हैं। फरवरी के बाद मौसम में गर्मी बढ़ते ही पक्षी अपने बच्चों के साथ फिर अपने देश को लौट जाते हैं। तीन महीने चंबल क्षेत्र विदेशी पक्षियों के प्रवास से गुंजायमान रहता है। इस दौरान चंबल सफारी किसी बड़े पक्षी विहार से कम नहीं लगता है। वहीं दूसरी ओर सर्दियों में ही चंबल किनारे बड़ी संख्या में जलीय जीवों के झुंड भी दिखते हैं।
पिछले साल की गणना के अनुसार चंबल में 35 सौ से अधिक मगरमच्छ, 3 हजार के लगभग घड़ियाल तथा करीब ढाई सौ डॉल्फिन के जोड़े संरक्षित हैं। वहीं इस बार दुर्लभ प्रजाति सुंदरी के कछुए भी खूब देखने को मिल रहे हैं।
चंबल डीएफओ दिवाकर श्रीवास्तव ने बताया कि पिछले वर्षों की अपेक्षा इस वर्ष मेहमान पक्षी बड़ी संख्या में चंबल सेंक्चुअरी पहुंचे हैं। पक्षियों के ठहराव में किसी प्रकार की असुविधा न हो इसका पूरा ध्यान रखा जा रहा है।
फोटो संख्या 06- चंबल नदी के किनारे अठखेलियां करते दुर्लभ प्रजाति के विदेशी पक्षी और जलीय जीव- फोटो : ETAWAH
फोटो संख्या 07- चंबल नदी के किनारे अठखेलियां करते दुर्लभ प्रजाति के विदेशी पक्षी और जलीय जीव- फोटो : ETAWAH
फोटो संख्या 08- चंबल नदी के किनारे अठखेलियां करते दुर्लभ प्रजाति के विदेशी पक्षी और जलीय जीव- फोटो : ETAWAH