इटावा। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर लगी चुनावी आचार संहिता को दो सप्ताह पूरे होने के बाद 50 हजार की धनराशि तक की पाबंदी को लेकर लोगों की खासकर व्यापारियों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं।
व्यापारियों का कहना है कि महंगाई के दौर में बैंकों से निकाली जाने वाली 50 हजार की धनराशि को बढ़ाने पर भी ध्यान देना चाहिए था। इस समय सहालग का दौर भी शुरू होने से मुश्किलें और ज्यादा बढ़ती जा रही हैं।
सराफा कारोबारी राजीव चंदेल का कहना है कि इस लिमिट का असर सबसे ज्यादा सराफा कारोबारियों पर पड़ रहा है। महंगाई के दौर में 50 हजार रुपये की लिमिट कोई मायने नहीं रखती है।
एक ओर चुनाव आयोग ने प्रत्याशियों के खर्च सीमा को 30 लाख से बढ़ाकर 40 लाख रुपये कर दिया है, लेकिन व्यापारियों की लिमिट को नहीं बढ़ाया। चुनाव आयोग से मांग है कि लिमिट को बढ़ाकर कारोबारियों की मुश्किलों को दूर करें।
उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल यूपी के जिलाध्यक्ष आलोक दीक्षित का कहना है कि 50 हजार रुपये से कम नकदी साथ लेकर चलने पर किसी तरह की पाबंदी नहीं है, हालांकि, इससे अधिक की नकदी साथ लेकर चलने के लिए तीन दस्तावेज साथ में होने जरूरी है।
कहा कि चुनाव आचार संहिता के नाम पर चेकिंग में व्यापारियों की नकदी पकड़ी जा रही है। सर्वाधिक दिक्कत उन व्यापारियों को हो रही, जो जिलों में फुटकर दुकानदारों से लेकर आते हैं और जांच के दौरान पुलिस का शिकार बनते हैं।
पुलिस की इस कार्रवाई से मंडी और व्यापार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। व्यापारियों की आमद कम हुई है, जबकि रुपये लेकर चलने में उनकी हिम्मत नहीं होती है। इस वजह से करीब 30 फीसदी कारोबार घट गया है।
अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के जिला महामंत्री धर्मेंद्र कुमार जैन का कहना है कि इस समय सहालग का दौर शुरू हो गया है।
इस वजह से बाजार में ग्राहकों की आमद बढ़ गई है, लेकिन चुनाव आचार संहिता के चलते व्यापारियों को बैंकों में 50 हजार से अधिक की धनराशि को लेकर शक की निगाह से देखा जा रहा है।
कहा कि ऐसा हर बार के चुनाव में होता है, पर आयोग को जितनी चिंता चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों की है, उतनी थोड़ी सी भी चिंता व्यापारियों करता तो शायद व्यापारियों को अपनी ही धनराशि को लेकर इतनी चिंता करने की जरूरत शायद नहीं पड़ती।
चेकिंग के नाम सबसे ज्यादा परेशान व्यापारी
चुनाव आचार संहिता के नाम पर की जा रही चेकिंग के नाम पर पकड़ी जा रही नगदी से सबसे ज्यादा व्यापारियों को परेशानियां हो रही है। कैश के मामले में सिर्फ राजनीतिक व्यक्तियों से संबंधित लोगों के धन की जांच होनी चाहिए।
व्यापारिक गतिविधियों में इस्तेमाल होने वाले धन को चुनाव से मुक्त रखा जाए। प्रशासन व्यापारियों को नाजायज परेशान न करे। बढ़ती महंगाई एवं सर्दी के कारण व्यापार पूरी तरीके से प्रभावित हो चुका है।
- आकाशदीप जैन, सराफा कारोबारी
व्यापारी ही नहीं आम जनता भी होती परेशान
चुनाव अचार संहिता से व्यापारी ही नहीं, बल्कि आम जनमानस को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। सहालग का दौर चल रहा, व्यापारी और जनता बड़ी मात्रा में रुपये लेकर बाजार आते हैं और दूसरे शहर में भी जाते हैं।
ऐसे में प्रशासन के चेक करने और 50 हजार से अधिक की नकदी होने पर कई सवालों का जवाब देना पड़ता है, जिससे व्यापारियों का समय बर्बाद होता है। सबूत दिखाने और संतुष्ट होने के बाद ही व्यापारी को जाने की इजाजत होती है। ऐसे में काफी समय व्यर्थ में बर्बाद हो जाता है।
- मनोज अग्रवाल, अध्यक्ष, सावधान संस्था