इकदिल। थाना क्षेत्र के रामनगर नावली निवासी बीएसएफ कर्मी और उसके परिवार पर हमले के मामले में विवेचना करने वाले विवेचक दरोगा को बदल दिया गया है। अब मामले की विवेचना थाने के वरिष्ठ उप निरीक्षक को दी गई। उधर, इस मामले में छह दिन बाद भी मेडिकल रिपोर्ट नहीं आई है। इस पर सवाल उठ रहे हैं।
रामनगर नावली निवासी बीएसएफ कर्मी देवी चरन की वर्तमान में भारत-बांग्लादेश बॉर्डर पर त्रिपुरा में तैनात है। वह हाल में ही छुट्टी पर अपने गांव आया था। 31 दिसंबर को गांव के ही कुछ लोगों ने उसके घर पर हमला बोल दिया था। इसमें देवी चरन, उसके पिता, पत्नी व परिवार के अन्य लोग घायल हो गए थे। इस मामले में पुलिस की भूमिका पर शुरू से सवाल उठ रहे हैं। पुलिस ने एक पक्ष की ओर से फौरन रिपोर्ट दर्ज कर ली थी, लेकिन बीएसएफ कर्मी की एफआईआर दो दिन तक नहीं दर्ज की गई थी। पुलिस की कार्रवाई से असंतुष्ट बीएसएफ कर्मी अपने घायल पिता व परिवार के अन्य लोगों के साथ मंगलवार को कलक्ट्रेट और फिर एसएसपी आफिस के सामने धरने पर बैठ गया था। एसपी सिटी कपिल देव ने कार्रवाई का आश्वासन दिया था।
उसके बाद मामले की विवेचक दरोगा दयानंद पटेल से विवेचना छीन ली गई। अब इस मामले में की विवेचना वरिष्ठ उप निरीक्षक विष्णुकांत तिवारी को सौंपी गई है। उधर, इस मामले में अभी मेडिकल रिपोर्ट नहीं आने की वजह से दर्ज एफआईआर में किसी तरह की धारा नहीं बढ़ाई गई है। पीड़ित देवी चरन ने बुधवार को फिर इकदिल थाना प्रभारी अलम अहिरवार से मुलाकात करके मामले में उचित कार्रवाई की मांग की है। थाना प्रभारी ने कहा कि मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद जरूरी हुआ तो धाराएं बढ़ाई जाएंगी।
5 जनवरी को अमर उजाला में प्रकाशित खबर की पीडीएफ- फोटो : ETAWAH