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मकान गिर न जाए, तो आसपास की छतों पर जमाया डेरा

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इटावा। चंबल और यमुना नदी का जल स्तर खतरे से निशान से भले ही नीचे चला गया है, लेकिन बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लोगों की परेशानियां कम नहीं हो रही हैं। लोगों को कच्चे मकान ढहने का डर सता रहा है। कई परिवार ने आसपास के मकानों की छतों पर डेरा जमा रखा है तो कई लोग पेड़ों के नीचे खुले में रह रहे हैं। वहीं, कई गांवों में अभी तक बिजली व्यवस्था बहाल नहीं हो सकी है।
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अमर उजाला की टीम सोमवार को चकरनगर क्षेत्र के ककरईया गांव बाढ़ प्रभावित लोगों का हाल जानने पहुंची। पीड़ित प्रमोद कुमार, राजेश कुमार, चंद्रशेखर, फूल सिंह, बाबू सिंह, अमर सिंह, रामबाबू, महेंद्र सिंह ने बताया कि अभी तक उनके नाम बाढ़ प्रभावित लोगों की सूची में दर्ज नहीं किए गए हैं। नुकसान का आकलन कर रही सूची में भी उनके नाम नहीं हैं।
बताया कि लेखपाल आए थे, कुछ लोगों के नाम लिखकर चले गए। राजस्व विभाग की टीम गांव के कुछ लोगों के यहां बैठकर नुकसान का आकलन कर चली गई। यही हाल हरौली, चकरपुरा, निधि और धर्मपुरा समेत कई गांवों में का नजर आया है। यहां के लोग मकान गिरने के डर से आसपास के घरों की छतों व खुले में पॉलिथीन डालकर गुजर बसर करने को मजबूर हैं। लोगों को प्रशासन की मदद का इंतजार है।
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एसडीएम चकरनगर सत्य प्रकाश का कहना है कि वह खुद राजस्व टीम के साथ बाढ़ में बेघर हुए लोगों की जांच कर रहे हैं। बाढ़ प्रभावित 31 गांव में 31 टीमें नुकसान का आकलन कर रही हैं। सर्वे के बाद सरकार को आर्थिक सहायता की डिमांड भेजी जाएगी। सभी गांवों में प्राथमिकता के आधार पर सर्वे चल रहा है। बढ़पुरा क्षेत्र में बाढ़ प्रभावित गांवों में नुकसान का आकलन राजस्व विभाग की टीमें कर रही है। पीड़ितों का कहना है कि प्रशासन मदद करें तो नए सिरे से गृहस्थी बसा वह लोग गुजर बसर कर सकें।
चकरनगर। बाढ़ प्रभावित इलाकों में कई गांवों में बिजली व्यवस्था अभी पटरी पर नहीं आ सकी है। शोभाराम ,गोपाल, नरेंद्र और विनोद सिंह ने बताया कि आपूर्ति शुरू तो हो गई, लेकिन पूरे दिन बिजली नहीं मिल पा रही है। आपूर्ति सुचारु तरीके से न होने से लोग उमस भरी गर्मी में परेशान हैं। रात में भी बिजली घंटों गुल हो जाती है। चकरनगर क्षेत्र के अवर अभियंता विद्युत रचित शर्मा ने बताया क्षेत्र की बाढ़ प्रभावित गांवों की बिजली सुचारु रूप से सोमवार देर शाम चालू कर दी गई है।
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