इटावा। नवीं मोहर्रम को शिया समाज के इमामबाड़ों में हुई मजलिसों में अजादारों ने या हुसैन की सदाएं बुलंद की। घटिया अजमत अली पर शहीद-ए-आजम इमाम हुसैन के ताबूत समेत जुलजना, झूले की जियारत की। आलमपुरा से निकला ताजिये का जुलूस शहर के मुख्य मार्गों पर घूमा।
घटिया अजमत अली स्थित अली मेंहदी के आवास पर हुई मजलिस में मौलाना सैयद अनवारुल हसन जैदी ने कर्बला में इमाम हुसैन द्वारा पेश की गई कुर्बानी का वर्णन किया। मजलिस के दौरान शहीद-ए-आजम इमाम हुसैन के ताबूत, जुलजये व अली असगर के झूले की जियारत की, जो मातमी नौहा ख्वानी के साथ इमामबाड़े पहुंचा, जहां महिलाओं ने जियारत की।
आलमपुरा में टीएच रिजवी की ओर से आयोजित मजलिस में हजरत अब्बास के अलम की जियारत की गई। आलमपुरा से मुशीर हैदर की देखरेख में कदीमी ताजिये का जुलूस निकाला गया, यह जुलूस कोतवाली चौराहा, नगर पालिका चौराहा, पक्की सराय बड़ा इमामबाड़ा, तिकोनियां, सराय शेख, शीश महल होकर आलमपुरा पहुंचा। इस दौरान रास्ते में मातमी नौहा ख्वानी की गई। इसके अलावा शहर में शिया समाज की ओर से विभिन्न इमामबाड़ों व घरों में पुरुषों और महिलाओं की मजलिस आयोजित की गई। मजलिसों में मौलाना अनवारुल हसन जैदी, मौलाना डॉ. मीर कल्बे अब्बास (मेरठ) व तालिब कानपुरी ने जिक्रे कर्बला का दर्दनाक मंजर पेश किया तथा जाफर ईरानी, अली आविद, अयाज हुसैन बब्लू, अलीशान, राहिल आदि ने नौहा ख्वानी की। मजलिसों में शावेज नकवी, हाजी कमर अब्बास नकवी, राहत अकील, राहत हुसैन रिजवी, अली मेंहदी, अबरार हुसैन, गुलामुस सइदैन, आरिफ हैदर, खुर्शीद जाफरी आदि मौजूद रहे।