इटावा। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 33 सहायक शिक्षकों को बेसिक विद्यालयों में फिर से कार्यभार ग्रहण कराया जा रहा है। इन शिक्षकों ने डॉ. भीमराव आंबेडकर आगरा विश्वविद्यालय आगरा से वर्ष 2004-05 में बीएड की डिग्री हासिल की थी। एसआईटी जांच के आधार पर इन शिक्षकों को बर्खास्त कर दिया गया था। गुरुवार को बीएसए उमानाथ ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आधार पर सभी शिक्षकों को कार्यभार ग्रहण कराने के आदेश खंड शिक्षा अधिकारियों को दे दिए।
आगरा के वर्ष 2005 बीएड प्रशिक्षित 33 सहायक शिक्षकों की नियुक्ति इटावा जिले में वर्ष 2010 से 2012 के बीच की गई थी। प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद वर्ष 2010 के बाद नियुक्त शिक्षकों के प्रमाण पत्रों की जांच एसआईटी से कराई गई।
चार जनवरी 2020 को तत्कालीन बेसिक शिक्षा अधिकारी ने सभी सहायक शिक्षकों को बर्खास्त कर दिया था। सभी शिक्षकों ने शासन और विभागीय आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
इसके बाद शिक्षकों ने सुप्रीम कोर्ट की शरण ली। सुप्रीम कोर्ट ने मामले का संज्ञान लेते हुए सभी शिक्षकों को जुलाई महीने से वेतन जारी रखने के आदेश दिए।
जुलाई 2021 से सभी शिक्षकों को वेतन तो मिल रहा था परंतु उन्हें विद्यालयों में शिक्षण कार्य कराने की अनुमति नहीं दी गई। तब से शिक्षक घर बैठे ही पगार पा रहे थे।
22 फरवरी 2022 को सुप्रीम कोर्ट ने अनुज्ञा याचिका की सुनवाई पर अंतिम आदेश जारी करते हुए सभी सहायक शिक्षकों को विद्यालयों में ज्वाइनिंग कराने के आदेश जारी किए।
कोर्ट के आदेश के बाद शासन और विभाग ने बेसिक शिक्षा अधिकारी को आदेश का अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बीएसए उमानाथ ने सभी 33 सहायक शिक्षकों को पूर्व में ही कार्यरत विद्यालयों में कार्यभार ग्रहण करने की अनुमति जारी कर दी।
इन शिक्षकों को मिली है ज्वाइनिंग
अजय कुमार, विकास चंद्र, जितेंद्र सिंह, भारती वर्मा, धर्मेंद्र सिंह, दिनेश चंद्र, सत्यप्रकाश, अनिल कुमार, सतेंद्र कुमार, सुनील कुमार, सारिका, नरेंद्र प्रताप, प्रवेंद्र कुमार, राजेश यादव, मीरा, हरीशचंद सिंह, सीमा यादव, सत्यवीर, दयेंद्र मणि, सुनील शर्मा, सुकीर्ति तिवारी, जसवंत सिंह भदौरिया, ज्ञानेंद्र कुमार, संध्या, रवींद्र सिंह, रामप्रकाश, दिनेश कुमार, विमलेश यादव, सर्वेश कुमारी, रजनेश कुमारी, शशि, मनोरमा यादव व सीमा यादव