इटावा। अपर सत्र न्यायाधीश व विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट राम प्रताप सिंह राणा ने तीन साल पुराने बालिका से दुष्कर्म के एक मामले की सुनवाई करते हुए एक युवक को दोषी पाया। दोषी पाए जाने पर कोर्ट ने उसे पच्चीस साल की सजा व बीस हजार रूपए के अर्थछंड से भी दंडित किया।
विशेष लोक अभियोजक पॉक्सो एक्ट दशरथ सिंह चौहान ने बताया कि बसरेहर क्षेत्र के एक गांव की नौ वर्षीय बालिका सात जुलाई 2019 को शाम के समय अपने घर के पास लगे हैंडपंप पर पानी भरने के लिए गई थी। तभी पडोस में रहने वाले भूपाल सिंह ने बालिका को टॉफी का लालच देकर उसे अपने घर लिवा ले गया और उसे साथ दुष्कर्म किया। उसने बच्ची को धमकी दी कि उसने किसी को बताया तो वह उसे जान से मार देगें। इस कारण से बच्ची ने घर पर किसी को नही बताया। जब बच्ची की उठने बैठने में परेशानी हुई तो परिवार के लोगों ने पूछा।
बाद में बच्ची ने अपने साथ घटना के बारे में जानकारी दी।जानकारी मिलने के बाद बच्ची के पिता ने भूपाल सिंह के खिलाफ थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। रिपोर्ट दर्ज होने के बाद पुलिस ने बच्ची का डाक्टरी परीक्षण कराया तथा उसने कोर्ट में ब्यान कराए। छानवीन के बाद पुलिस ने आरोप पत्र कोर्ट में पेश कर दिए। मामले की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश व विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट राम प्रताप सिंह राणा ने की।
विशेष लोक अभियोजक दशरथ सिंह चौहान के द्वारा पेश किए साक्ष्यों, गवाहों को बचाव पक्ष के वकील काटने में सफल नही हुए। बचाव पक्ष के वकीलों ने उसे निर्दोष साबित करने के लिए साक्ष्य दिए लेकिन वह कोर्ट को संतुष्ट नही कर सके। दोनो पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने साक्ष्यों के आधार पर भूपाल सिंह को दोषी पाते हुए उसे 25 साल के कठोर कारावास की सजा व बीस हजार के अर्थदंड से दंडित किया। कोर्ट ने कहा कि उसने जघन्य व घृषित अपराध किया किया है इस कारण उसे सजा में रियायत नही दी जा सकती । बीस हजार जमा न करने पर उसे दो साल की अतिरिक्त सजा भोगनी पडेगी। जुर्माने की रकम पीडिता के चिकित्सीय व्यय व पुनर्वास की पूर्ति के लिए की जाएगी।