आगरा। गैर हिंदी भाषी राज्यों के विद्यार्थी हों या विदेशी। हिंदी सीखने के लिए केंद्रीय हिंदी संस्थान में आने की बाध्यता नहीं होगी। संस्थान ने इनके द्वार तक हिंदी को पहुंचाने की योजना बना रखी है। लघु अवधि के पाठ्यक्रम संचालित किए जाएंगे। विद्यार्थी इन्हें अपने घर बैठे ऑनलाइन सीख सकेंगे।
स्वदेशी विद्यार्थियों के लिए संस्थान ने लघु अवधि का पाठ्यक्रम तैयार कर लिया है। इसमें प्रवेश के लिए आवेदन भी मांगे गए हैं। हिंदी भाषा कौशल नाम से तीन माह का पाठ्यक्रम तैयार किया गया है जिसे संस्थान के अकादमिक परिषद से मंजूरी भी मिल गई है। संस्थान के निदेशक प्रो. सुनील बाबुराव कुलकर्णी ने बताया कि तीन-माह का पाठ्यक्रम वर्ष में दो बार संचालित किया जाएगा। विद्यार्थी सामान्य संपर्क की भाषा सीख सकेंगे। अभी तक संस्थान में आकर सीमित संख्या में ही विद्यार्थी हिंदी का प्रशिक्षण प्राप्त कर पाते हैं। ऑनलाइन पाठ्यक्रम की समय सारिणी विद्यार्थियों के अनुकूल रखी जाएगी, जिससे वह बाकी पाठ्यक्रमों की पढ़ाई या दूसरे काम के साथ हिंदी सीख सकेंगे।
विदेशी विद्यार्थियों के लिए तैयार किया जा रहा पाठ्यक्रम
संस्थान के निदेशक ने बताया कि विदेशी विद्यार्थियों के लिए लघु अवधि का पाठ्यक्रम तैयार किया जा रहा है। इसे भी ऑनलाइन ही पढ़ाया जाएगा। यह 15 से 20 दिन का पाठ्यक्रम होगा। इसमें विदेशी विद्यार्थियों को हिंदी की सामान्य जानकारी दी जाएगी। जिससे वह हिंदी के प्रचलित शब्दों को जान सकें। अभी संस्थान के आगरा मुख्यालय व दिल्ली केंद्र को मिलाकर 100 सीटें विदेशी विद्यार्थियों के लिए हैं। संस्थान के नवीकरण व भाषा प्रसार विभागाध्यक्ष प्रो. उमापति दीक्षित का कहना है ऑनलाइन पाठ्यक्रम तैयार होने पर अपेक्षाकृत ज्यादा विदेशी विद्यार्थियों तक हिंदी की पहुंच बनाई जा सकती है। लघु अवधि के पाठ्यक्रम करने के बाद उनमें हिंदी सीखने की ललक और बढ़ेगी।
मध्य एशिया के राजदूतों के लिए पाठ्यक्रम तैयार
केंद्रीय हिंदी संस्थान ने मध्य एशिया के राजदूतों के लिए भी हिंदी का पाठ्यक्रम तैयार किया है। विदेश मंत्रालय की मंशा के अनुरूप हिंदी संस्थान ने पाठ्यक्रम तैयार किया है।