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बढ़ते भाव से क्रय केंद्रों पर गेहूं की आवक घटी

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एटा। लॉकडाउन का असर गल्ला मंडी पर भी पड़ रहा है। किसान बाजार तक आने में कतरा रहे हैं। इससे गल्ला मंडी की आवक पिछले वर्ष की तुलना में आधी रह गई है। आवक कम होने से मंडी में गेहूं का भाव औसतन साढ़े 1800 रुपये प्रति क्विंटल के करीब है। बाजार में गेहूं के भाव में उछाल आना तय माना जा रहा है। इससे सरकारी गेहूं खरीद पर ब्रेक लग सकता है।
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सरकारी गेहूं खरीद का लक्ष्य पूरा करने को लेकर जिला प्रशासन ने 90 खरीद केंद्र स्थापित किए हैं। क्रय केंद्र बार लक्ष्य का आवंटन किया है। केंद्रों पर अब तक 30 फीसदी के करीब गेहूं की खरीद हो सकी है। अधिकतर किसान केंद्र प्रभारियों की मनमानी के चलते केंद्र पर जाने से कतरा रहे हैं।
वहीं बाजार भाव और सरकारी भाव में अधिक अंतर नहीं है। किसानों का कहना है की आढ़त पर 1800 से लेकर 1860 रुपये प्रति क्विंटल तक गेहूं की बिक्री हो रही है और यहां नगद भुगतान मिल रहा है। वहीं, खरीद केंद्रों पर गेहूं बिक्री करने के बाद भुगतान के लिए चक्कर लगाने पड़ते हैं।
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उतराई, छनाई की धनराशि वापसी की उम्मीद नहीं
सरकार ने मूल्य समर्थन योजना के अंतर्गत 1925 रुपये प्रति क्विंटल गेहूं का समर्थन मूल्य निर्धारित किया है। क्रय नीत में उतराई, छनई के लिए किसानों से केंद्र पर 20 रुपये प्रति क्विंटल अतिरिक्त लिए जाने का प्रावधान है। यह रकम किसानों को वापस कर दी जाती है लेकिन इस बार वापसी की उम्मीद किसानों को नहीं दिख रही है।
खरीद केंद्र पर बोरों की समस्या धीरे-धीरे दूर हो रही है। किसान विभाग की वेबसाइट पर अपना पंजीकरण कराएं और अपना गेहूं केंद्र पर भेजें। अगर किसी तरह की समस्या आ रही है, तो वह जिला प्रशासन द्वारा स्थापित कंट्रोल रूम में शिकायत दर्ज कराएं। उनकी समस्या का त्वरित निस्तारण किया जाएगा।
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-नन्द किशोर, जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी
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