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पहले और दूसरे लॉकडाउन में तो मिला राशन, लेकिन अब बंद

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शशि - फोटो : ETAH
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निधौलीकलां (एटा)। लॉकडाउन के तीसरे चरण में गरीबों को दो वक्त की रोटी तक नसीब हो पा रही है। लघु और मझोले सहित फेरी-फुटपाथ दुकानदार जिन्हें पहले और दूसरे लॉकडाउन में समाजसेवियों सहित सरकार द्वारा राशन और भोजन के पैकेट दिए जा रहे थे, तीसरे लॉकडाउन में बंद है।
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इससे गरीबों के घरों में चूल्हा तक नहीं जल पा रहा है। जब इन लोगों से वार्ता की गई तो उनके आंसू निकल आए।
नगर पंचायत और स्वयंसेवी संस्थाओं ने 13 अप्रैल के बाद से किसी भी गरीब परिवार को खाद्य सामग्री उपलब्ध नहीं कराई है। पहले और दूसरे लॉकडाउन में नायब तहसीलदार, लेखपाल और कानूनगो की मौजूदगी में कस्बा के केवल 56 परिवारों को ही खाद्य सामग्री उपलब्ध कराई जा रही थी, पर वह भी बंद कर दी गई है।
वहीं, करीब 100 से अधिक ऐसे परिवार हैं, जिन्हें कोई भी खाद्य सामग्री उपलब्ध नहीं कराई गई है। इन गरीब और असहाय परिवार के लोग ऑटो, ढकेल, श्रमिक, विधवा आदि हैं जो अब तक घर में जो धनराशि थी उसे गुजारा कर लिया। इन्हें न तो राशन ही मिल पाया है और न ही एक हजार रुपये ही खाते में आए हैं।
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कृषि से संबंधित खुरपी, फावड़ा आदि वस्तुएं बनाकर अपने परिवार के छह सदस्यों का लालन-पालन करता हूं, मगर लॉक डाउन के चलते काम बंद है खाद्य सामग्री खत्म हो चुकी है। एक समाजसेवी द्वारा एक बार पांच किलो चावल और आटा आदि खाद्य सामग्री मिली थी। उसके बाद कोई भी आर्थिक सहायता और खाद्य सामग्री उपलब्ध नहीं मिली है। परिवार को चलाना बड़ा कठिन हो रहा है।
-महेंद्र, लोहा कारीगर
पति सजा याफ्ता है। ऐसे में अकेले ही मजदूरी कर अपना और अपने एकमात्र पुत्र का पेट पालती हूं। जब से लॉकडाउन हुआ है। एक बार ही सरकारी या गैर सरकारी किसी भी तरह की खाद्य सामग्री उपलब्ध हुई कराई गई है। घर में जो था सब खत्म हो गया, जिस-जिस से उधार मांग सकते थे, मांग लिया। अब तो लोग उधार भी नहीं दे रहे हैं। ऐसे में खाने के लिए मोहताज हैं।
पुष्पा देवी, मजदूर
पति ने छोड़ दिया है। दो बच्चों को लेकर कस्बा में किराये के मकान में रहती हूं। लॉकडाउन से पहले मजदूरी पर बिछिया बनाकर बच्चों का पेट पालती थी। अब काम बंद हो गया है। अब उधार लेकर भी परिवार चला नहीं पा रही हूं। थाना परिसर में एक बार खाद्य सामग्री मिली थी। मगर दूसरी बार कोशिशों के बाद नहीं मिली। पचास दिन से अधिक होने के बाद जीवन यापन करना असंभव हो रहा है।
-शशि, बिछिया कारीगर
बेटा दूसरों की दुकान पर दिहाड़ी मजदूरी कर घर चलाता है। अब बच्चों का दुकानों पर काम छूट गया। परिवार को चलाने में बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। अब तक प्रशासन और समाजसेवी संस्थाओं द्वारा खाद्य सामग्री या आर्थिक सहायता नहीं मिली है। इसकी वजह से परिवार चलाने में बड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कई बार भूखे पेट भी सोना पड़ा है।
-सीमा।
लोगों को राशन उपलब्ध कराया जाएगा
राशन और भोजन सामग्री का वितरण करना बंद नहीं हुआ है। बाहर से निरंतर मजदूर आ रहे हैं। इन्हें भी 15 दिन के राशन की किट दी जा रही है। इसके चलते कुछ अव्यवस्था जरूर कह सकते हैं, फिर भी जिसके यहां राशन खत्म हो गया होगा, उन्हें उपलब्ध कराया जाएगा।
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विवेक मिश्रा, एडीएम

सीमा - फोटो : ETAH

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