फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

दो और किसानों की गई जान

Wed, 01 Apr 2015 11:49 PM IST
ब्यूरो अमर उजाला एटा
विज्ञापन
विज्ञापन

विज्ञापन
निधौलीकलां के गांव सभापुर निवासी वीरेश (42) पुत्र राजवीर के नाम पर चार बीघा खेती थी, जिसमें गेहूं की फसल बोई थी। पोस्टमार्टम गृह पर पहुंचे ग्रामीणों ने बताया कि बेमौसम बरसात से वीरेश की फसल बर्बाद हो गई थी। सात मार्च को पिता राजवीर सिंह (60) की सदमा लगने से मौत हो गई थी। काफी गरीब होने के कारण वीरेश का सहारा केवल खेती ही थी। वह भी नष्ट हो चुकी थी। ग्रामीणों ने बताया कि फसल में हुए नुकसान को लेकर मंगलवार शाम वीरेश को सदमा लग गया। हालत बिगड़ने पर ग्रामीण जिला अस्पताल लेकर आ रहे थे, मगर रास्ते में मौत हो गई। बाद में शव को गांव ले गए। पुलिस को सूचना दी। जानकारी पर पहुंची पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया है। मृतक की पत्नी सुषमा देवी ने थाने में दी तहरीर दी बारिश से हुई फसल बर्बाद देख पति को सदमा लग गया, जिससे उनकी मौत हो गई। मृतक अपने पीछे दो बच्चों को छोड़कर गया है।



ललेसर में भ्ाूरी िससिंह की माैत के मामले में ग्रामीणों ने बताया कि गांव नगला उदी निवासी भूरी सिंह को पहले आलू की फसल में नुकसान हुआ था। बुधवार दोपहर एक बजे किसान जब अपने खेत में गेहूं की कटाई कर रहा था तो नुकसान को देखकर भूरी सिंह को सदमा लग गया और उसकी हालत बिगड़ गई। ग्रामीणों ने जलेसर-फीरोजाबाद मार्ग पर शव रखकर जाम लगा दिया और एसडीएम को मौके पर बुलाने, मुआवजा की मांग करने लगे। सूचना मिलते ही उपजिलाधिकारी रविप्रकाश श्रीवास्तव, थाना पुलिस पहुंची और जाम खुलवाया। जिले में अब तक तीन किसानों की मौत हो चुकी है। भाजपा नेता दर्शनपाल सिंह, भाकियू भानू की युवा इकाई के जिलाध्यक्ष सतेंद्र सिंह भूपेंद्र सिंह, पूर्व प्रधान विजय सिंह आदि ने प्रशासन से मुआवजे की मांग की।
विज्ञापन
विज्ञापन



मगर प्रशासन है कि मानता ही नहीं
जिले में फसल बर्बादी को लेकर एक के बाद एक किसान दम तोड़ रहा है लेकिन प्रशासन किसी भी मौत को फसल बर्बादी का कारण नहीं मान रहा है। जांच में बीमारी से हुई मौत की बात बताकर पल्ला झाड़ लेता है।





जानकारी मिलने पर लेखपाल को मौके पर भेजा है। लेखपाल की रिपोर्ट के बाद ही स्थिति साफ होगी।
- अजीत कुमार, एसडीएम सदर

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें