अरविंद अग्रवाल ने फोन पर संवाददाता को बताया कि 22 अप्रैल को घटना के बाद सेना के वाहनों और एंबुलेंस के सायरन की आवाज सुनकर चालक ने टैक्सी रोक ली। बताया कि वहां कुछ गोलीबारी की घटना हो गई है। आतंकी हमले की जानकारी पर ठहर गए।
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घटना के बाद चारों तरफ सेना के जवान ही दिख रहे थे। हमले में शिकार हुए लोगों के रोते-बिलखते परिजन थे। गर्मी की छुट्टियों में घूमने गए सभी पर्यटक डरे-सहमे वापस अपने होटल पहुंचकर कमरों में बंद हो गए। सीए ने बताया कि आतंकी हमले की घटना के बाद लोग डर गए थे, लेकिन उनके परिवार का हौसला नहीं टूटा था। इससे पहले 18 अप्रैल को श्रीनगर, 19 को सोनमर्ग, 20 को बुद्धपथरी, 21 को गुलमर्ग घूमे। 22 को पहलगाम पहुंचे।
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घटना के बाद 23 अप्रैल को बाकी स्थानों पर घूमने के बाद बृहस्पतिवार को वापस एटा आए हैं। बृहस्पतिवार दोपहर को वह फ्लाइट से दिल्ली पहुंचे। वहां से टैक्सी से शहर में अपने घर के लिए निकल आए। आतंकी हमले के बाद सकुशल घर आने पर उनके शुभचिंतक बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।