एटा के गांव रसूलपुर गढ़ौली में सोमवार दोपहर 12 माह के मासूम की पानी से भरी देग में डूबने से मौत हो गई। घटना के समय बच्चे की मां आंगन में पशुओं को चारा डाल रही थी। इसी बीच नींद से जागा मासूम चारपाई से उतरते समय असंतुलित होकर पास रखी पानी भरी देग में जा गिरा। परिजन बच्चे को निजी चिकित्सक के पास ले गए, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया।
दुर्गेश का 12 माह का पुत्र कार्तिकेय सोमवार दोपहर घर में चारपाई पर सो रहा था। उसकी मां आंगन में पशुओं को चारा डालने में व्यस्त थी। इसी दौरान कार्तिकेय की नींद खुल गई। वह चारपाई से नीचे उतरने लगा और संतुलन बिगड़ने से पास रखी पानी से भरी देग में जा गिरा। कुछ देर बाद जब मां कमरे में लौटी तो बच्चा चारपाई पर नहीं था। उसने घबराकर आसपास तलाश शुरू की।
तलाश के दौरान मासूम पानी की देग में उल्टा पड़ा मिला। मां की चीख सुनकर परिवार के अन्य सदस्य भी मौके पर पहुंच गए। बच्चे को तुरंत बाहर निकालकर मिरहची कस्बे के एक निजी चिकित्सक के पास ले जाया गया, लेकिन चिकित्सक ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। चिकित्सक के अनुसार पानी में डूबने से दम घुटने के कारण उसकी मौत हो गई।
कार्तिकेय परिवार का इकलौता बेटा था। उसकी मौत से घर में चीख-पुकार मच गई। मां का रो-रोकर बुरा हाल है, जबकि पिता और अन्य परिजन भी सदमे में हैं। रिश्तेदारों और ग्रामीणों ने पहुंचकर परिवार को सांत्वना दी। गमगीन माहौल में मासूम का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
सीएमएस डॉ. एस चंद्रा ने बताया कि छोटे बच्चों को घर में कभी भी अकेला नहीं छोड़ना चाहिए। पानी से भरी बाल्टी, डेग, टंकी या अन्य जल स्रोत बच्चों के लिए जानलेवा साबित हो सकते हैं। थोड़ी-सी लापरवाही भी पूरे परिवार के लिए जिंदगी भर का दर्द बन सकती है।
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