कासगंज। टिड्डियों का दल कहीं जिले में वंश तो नहीं छोड़ गया। इसको लेकर किसान और कृषि विभाग दोनों ही चिंतित हैं। हालांकि कृषि विभाग का मानना है कि अधिकांश टिड्डियां पेड़ों पर रहीं, इसलिए ऐसी संभावना कम है।
मादा टिड्डी दल मिट्टी में कोष्ठ (सेल) बनाकर अंडे देती हैं। एक टिड्डी 20 से 100 अंडे कोष्ठ में रखती हैं। ऐसे में लाखों टिड्डियों के दल में मादा टिड्डियां जहां ठहरती हैं, वहां लाखों अंडे छोड़ जाती हैं। इसलिए किसानों की चिंता बढ़ी हुई है। वैसे कृषि विभाग ने किसानों को बताया है कि अधिकांश टिड्डियों को मार गिराया गया था। रातभर हुए प्रयास के कारण शायद ही ऐसा हो पाया हो, फिर भी विभाग जांच कर रहा है।
सोमवार को वापस लौटा दल
सोरों। रविवार को दिन में कृषि विभाग ने एक दल फर्रुखाबाद जिले की ओर दौड़ाया। सोमवार को यह दल फिर जिले की सीमा में आ गया। यह दल पश्चिम की ओर चलती हवाओं के साथ तेजी के साथ उड़ता रहा। बरकुला, किरामई, ब्रह्पुरी, हरनाथपुर, नहर बरकुला, मढ़ावली, लहरा, दतलाना सहित अन्य ग्रामों में कुछ स्थानों पर टिड्डियों ने फसलों को नुकसान पहुंचाया, लेकिन मुस्तैदी के चलते इस दल को दोपहर लगभग 3 बजे अलीगढ़ जिले की सीमा तक दौड़ा दिया गया।
किसानों की बात-
- टिड्डियों का दल जहां ठहरता वहां अंडे छोड़ जाता है। इस तरह की जानकारी हमें विशेषज्ञों से मिली। अब हमें चिंता सता रही है कि कहीं टिड्डियां अंडे छोड़ गईं होंगी तो और टिड्डियां जन्म न ले लें। - मुशर्रफ खान।
- टिड्डी दल ने किसानों की फसलों पर हमला किया है। कृषि विभाग को नुकसान का आंकलन करना चाहिए और टिड्डियों से बचाव के लिए कोई और तरीका अपनाना चाहिए। - रतन कुमार।