माध्यमिक स्कूलों के हालात नहीं सुधर रहे हैं। विद्यालयों की संख्या बढ़ी है। सर्वे में 89 विद्यालय कम निकले हैं।
जिले
में पांच साल पहले राष्ट्रीय माध्यमिक सर्व शिक्षा अभियान लागू किया गया।
अभियान के तहत 3 किमी क्षेत्र में एक उच्चतर माध्यमिक और 7 किमी क्षेत्र
में एक इंटर कालेज खोले जाने का मानक निर्धारित किया गया। मानक की पूर्ति
के लिए कराए सर्वे मेें 89 विद्यालय कम निकले। इन विद्यालयों की पूर्ति के
शासन को डिमांड भेजी गई। लेकिन इनमें से मात्र दो विद्यालयों को ही मंजूरी
मिल सकी।
जिले में दो राजकीय, तीन नगर पालिका और 25 शासकीय सहायता प्राप्त
विद्यालय संचालित हैं। इसके अलावा 129 वित्तविहीन विद्यालय हैं। शासकीय और
शासकीय सहायता प्राप्त विद्यालयों में शिक्षकों का टोटा है। तो वहीं
वित्तविहीन विद्यालयों में भी शिक्षा के हालात अच्छे नहीं हैं।
17 लैब केे प्रस्ताव है लंबित
राष्ट्रीय
माध्यमिक सर्व शिक्षा अभियान के तहत विज्ञान की लैब भी खोली जानी हैं।
पांच साल पहले 17 विज्ञान लैब विकसित करने के लिए प्रस्ताव भेजा था। यह
प्रस्ताव शासन में धूल फांक रहा है। विज्ञान की लैब न होने से विज्ञान के
छात्रों को प्रैक्टिकल करने का मौका नहीं मिल पाता।
शिक्षकों का है टोटा
माध्यमिक
विद्यालयों में शिक्षकों की भी काफी कमी चल रही है। शासकीय और सहायता
प्राप्त विद्यालयों में जरूरत के हिसाब से आधे शिक्षक भी नहीं हैं। 32
विद्यालयों में 570 पदों के सापेक्ष मात्र 220 शिक्षक ही कार्यरत हैं।
माध्यमिक विद्यालयों के उच्चीकृत करने के लिए शासन के पास डिमांड भेजी जा चुकी है, लेकिन प्रस्तावों को मंजूरी नहीं मिल सकी है।
-भूरी सिंह, जिला विद्यालय निरीक्षक