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सीएचसी का सच: कागजों में पोषाहार, पेट में सिर्फ चाय

Thu, 22 Oct 2026 11:08 PM IST
आगरा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
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जलेसर (एटा)। जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम के तहत प्रसूताओं को मिलने वाले भोजन और बुनियादी सुविधाओं में अनियमितताएं सामने आई हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) जलेसर में भर्ती प्रसूताओं को समय पर नाश्ता मिल रहा है और न लंच। परिजन घर से खाना लाने पर विवश हैं।
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राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत चलाई जा रही इस योजना का मकसद गर्भवती महिलाओं को सरकारी अस्पतालों में प्रसव के लिए प्रेरित करना और मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करना है। इसके लिए प्रसूताओं की डाइट पर प्रतिदिन 150 रुपये खर्च करने का प्रावधान है। इसमें सुबह नाश्ते में ब्रेड-मक्खन, दूध, अंडा, दही, मौसमी फल, लंच में दाल, मौसमी सब्जी, चावल, मौसमी फल और डिनर में दाल, रोटी, सब्जी शामिल है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जलेसर पर हर माह 100 से अधिक महिलाओं की डिलीवरी होती है। यहां की कहानी योजना के उलट है। प्रसूताओं का आरोप है कि उन्हें मेन्यू के मुताबिक भोजन नहीं मिल रहा है।

केस-1: चाय मिली, भोजन नहीं
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जलेसर में भर्ती नगला मोती की सोना ने बताया कि पिछले दो दिन से सीएचसी जलेसर में भर्ती हैं। डिलीवरी के बाद कल रात दलिया दिया गया है और आज सुबह 11 बजे तक चाय के अलावा कुछ नहीं मिला।
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केस-2: बेड पर चादर तक नहीं
गांव रेज़ुआ की सुनीता ने बताया कि हम पहले भी गांव की महिलाओं के साथ आए हैं। डिलीवरी वार्ड में गंदगी थी। बेड पर चादर भी बिछी नहीं है। उन्हें सुबह 11 बजे तक सिर्फ चाय दी गई। इसके साथ कुछ और नहीं दिया गया।

केस-3: कैंटीन भी बंद
गांव चिरगवां के तीमारदार सूरज ने बताया कि सुबह चाय दी गई थी। रात से सुबह 11 बजे तक कोई नाश्ता और भोजन नहीं दिया जा रहा है। बाहर एक कैंटीन है, वह भी बंद है।

केस-चार: नाश्ता मिला न भोजन
प्रसूता गुलतफा ने बताया कि वह दो दिन से यहां भर्ती हैं। उन्हें न तो नाश्ता ही दिया गया है और न ही भोजन। तीमारदार घर से भोजन लेकर आ रहे हैं।

72 घंटे भर्ती का है नियम, जल्दी कर दी जाती है छुट्टी
नियमानुसार प्रसूता को नॉर्मल डिलीवरी पर 48 घंटे भर्ती रखने का नियम है। ऑपरेशन में कम से कम 72 घंटे रखा जाना चाहिए लेकिन निर्धारित समय से पहले ही प्रसूताओं की छुट्टी कर दी जाती हैं। नॉर्मल डिलीवरी के मामलों में सीएचसी पर 80 प्रतिशत से अधिक महिलाओं की 24 घंटे के भीतर छुट्टी कर दी गई।

यह है नियम: जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम
सीएचसी पर गर्भवती महिलाओं के लिए पूरी तरह से निशुल्क इलाज का मानक है। अस्पताल में रहने के दौरान सभी जरूरी दवाइयां, इंजेक्शन और खून की जांच (ब्लड टेस्ट, अल्ट्रासाउंड आदि) पूरी तरह मुफ्त होती हैं। अस्पताल में रहने के दौरान प्रसूता को नियमानुसार निशुल्क पौष्टिक आहार दिया जाता है। घर से अस्पताल लाने के लिए और डिलीवरी के बाद जच्चा-बच्चा को सुरक्षित घर छोड़ने के लिए सरकारी एंबुलेंस (102 या 108 सेवा) पूरी तरह मुफ्त मिलती है।
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