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पीड़ितों के जख्मों पर व्यवस्था ने भी छिड़का नमक

Mon, 15 Jun 2015 11:03 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला एटा
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वह सोमवार दोपहर  1:45 बजे अपने बेटे स्थानीय सांसद राजवीर सिंह और परिवार के साथ गांव पुरा पहुंचे। उन्होंने कहा कि उनके पास इस समय राजस्थान के अलावा हिमालय प्रदेश के राज्यपाल का भी प्रभार है। लेकिन उन्हें जब इस हादसे की खबर लगी तो वह अपने को रोक नहीं पाए और तीसरे दिन 1250 किलोमीटर का सफर तय कर यहां चले आए। उन्होंने कहा कि वह जब चार में पढ़ते थे तब मां चिंतपूर्णी व नगरकोट गए थे, अब फिर जाने का कार्यक्रम था, लेकिन स्थगित कर दिया। परिवार के अन्य लोग भी वैष्णो देवी यात्रा पर थे, लेकिन सभी ने यात्रा बीच में ही छोड़ दी। बहू, नाती व नातिनी सब बोले, चुनाव के समय जिस गांव में घूमकर हमने वोट मांगे, अब वहां इतनी बड़ी विपदा आई है तो हम सब भी चलेंगे।
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उन्होंने बताया कि धर्मशाला से कुल्लू, कुल्लू से दिल्ली और दिल्ली से एटा पहुंचा हूं। राष्ट्रपति का कार्यक्रम था, शिष्टाचार के नाते राज्यपाल को उनकी अगुवानी और विदा करना होता है। लेकिन उन्हें हादसे से अवगत कराते हुए क्षमा मांगी। उन्होंने भी  कहा ‘यू गो’ वहां के लोगों को तुम्हारी जरूरत है। कल्याण सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से बात की और कहा कि जिंदगी की कोई कीमत नहीं होती है फिर भी इस दु:ख की घड़ी में यदि पीड़ितों की सहायता हो जाए तो इससे बड़ी क्या बात है।

 मृतकों के परिवारीजनों को सहायता राशि दो लाख से बढ़ाकर तीन लाख, गंभीर घायलों को 50 की जगह एक लाख व अन्य घायलों को 25-25 हजार रुपये दिए जाएं। उनकी यह बात मुख्यमंत्री ने मानी और सहायता राशि बढ़ाकर दी। क्षेत्रीय भाजपा सांसद राजवीर सिंह ने भी घटना पर दुख व्यक्त किया। वहीं रविवार रात गांव पहुंचकर मृतकों के परिवारीजनों को ढांढस बंधाया और हर संभव मदद का आश्वासन दिया।
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राज्यपाल कल्याण सिंह को सामने देख पीड़ित परिवारों का दर्द छलक पड़ा। इस दौरान सही इलाज नहीं मिलने की शिकायत उनसे की तो बताया कि किस तरह से व्यवस्था ने भी उनके जख्मों को कुरेदा।   
कल्याण सिंह,  पुत्रवधु व पूर्व विधायक कुसुमलता, नाती, नातिनी आदि के साथ 22 सीट वाले  हेलीकाप्टर से पुलिस लाइन में उतरे, जहां से सीधे गांव पुरा पहुंचे। उनके  आने से पहले ही प्रशासन ने जीटी रोड से गांव तक जाने  वाले मार्ग पर हो रहे गड्ढों में मिट्टी भरवाकर उन्हें बंद करा दिया गया।  उनका नाती उन्हें लेकर पहुंचा और  जहां-जहां वे जा रहे थे हाथ पकड़कर उन्हें ले जा रहा था। बाद में एक मिनट  का मौन धारण किया गया। बाद में अपने पास बुलाकर उनसे बात की। गांव के चरन सिंह ने  बताया कि उसकी पत्नी प्रियंका की इस हादसे में मौत हो गई। वह सात माह की  गभर्वती थी। इस दौरान उसके बच्चा हो गया, लेकिन बच्चा जिंदा या मर गया इसका पता नहीं चला है। इस पर सांसद राजवीर सिंह ने एसडीएम अजीत कुमार सिंह को  बुलाया और कहा कि किसी तरह भी इसका पता लगाकर पीड़ित को बताए।

एक पीड़ित ने चेक में गलत नाम दर्ज होने  की शिकायत की। इस दौरान गांव के लोगों का कहना था कि राज्यपाल गांव तक तो  आए, लेकिन पीड़ितों के घरों तक उन्हें सांत्वना देने नहीं पहुंचे, जबकि  उन्हें हर घर में जाना चाहिए था। इस मौके पर फर्रुखाबाद सांसद मुकेश  राजपूत, अलीगंज के पूर्व चेयरमैन प्रदीप गुप्ता, दिनेश गुप्ता, सत्यपाल  सिंह राठौर, डाक्टर दिनेश वशिष्ठ, भाजपा जिलाध्यक्ष पंकज गुप्ता एडवोकेट के  अलावा अन्य भाजपा नेता मौजूद थे। राज्यपाल ढाई बजे जिला अस्पताल के लिए रवाना हो गए।


जिला अस्पताल में घायलों के साथ बैठे युवक संजय सिंह ने  सही इलाज और उचित मुआवजा नहीं मिलने की बात कही। पीड़ित ने बताया कि ताई कृष्णा देवी जिला अस्पताल में भर्ती हैं, उसकी बहन मालती के पैर पूरी तरह से खराब हो चुके हैं, एसएन मेडिकल कालेज आगरा में  सही इलाज न मिलने पर अब प्राइवेट नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया है।  मुआवजा केवल 25 हजार रुपये ही दिया गया है। सांसद ने कहा कि वह अलीगढ़  अस्पताल में उनका इलाज कराएंगे। उन्होंने कहा कि जो घायल आगरा व दिल्ली में भर्ती हैं वह सभी से मिलने जाएंगे और अच्छे से अच्छा इलाज कराया जाएगा। इस संबंध में सीएमओ व  प्रभारी डीएम से भी बात हुई है। अस्पताल में घायल पिंकी का इलाज करा रहे राधेश्याम ने भी सही इलाज कराने की मांग की। सीएमएस डाक्टर  प्रदीप कुमार का कहना है कि सभी घायलों को उचित उपचार दिया जा रहा है।



घायलों के इलाज में लापरवाही बर्दाश्त नहीं
पुरा हादसे में घायल हुए लोगों का हालचाल जानने सोमवार की सुबह एमएलसी व सपा जिलाध्यक्ष रमेश यादव,  प्रभारी जिलाधिकारी साहब सिंह पहुंचे। इस दौरान मुख्यमंत्री राहत कोष से गंभीर रूप से घायल हुए लोगों के परिवारीजनों को राहत राशि के चेक प्रदान किए। उन्होंने  जिला अस्पताल में मौजूद चिकित्सक स्टाफ, अधीनस्थों को निर्देश दिए कि घायलों की उपचार में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए, उनकी हर संभव मदद की जाए। साथ ही खाने, पीने, विद्युत व्यवस्था का विशेष रूप से ध्यान रखा जाए।


एमएलसी और डीएम ने उमेश, कुमारी आशा, कुमारी रजनी, अर्चना, ललिता, इंद्रजीत सिंह, संगीता, संतोष, अशोक, खुशबू, नीलेश मंजेश, पुष्पा देवी, पिंकी, कृष्णा देवी, नीतू अंजली, लाखन, नेहा, पाती देवी, रजनी, मंजू, कुसुमा देवी, श्रीकृष्ण, भावना, कल्पना, पतरी, रागिनी, निधि, मालती, मंजू, बेबी निवासी पुरा थाना मलावन आदि में से 11 गंभीर रूप से घायलों के परिजनों को एक-एक लाख एवं अन्य सभी के परिजनों को 25-25 हजार रुपये की सहायता राशि के चेक प्रदान किए। प्रभारी डीएम ने कहा कि शासन के निर्देशानुसार कृषक दुर्घटना बीमा योजना के तहत चार मृतकों के परिवारीजनों को सहायता राशि दी जाएगी। आठ लोगों को परिवारीजनों को पारिवारिक लाभ योजना के तहत लाभान्वित किया जाएगा।

पुरा हादसा: घायलों की संख्या 38 से पहुंची 41
सोमवार को तीन ओर घायलों को जिला अस्पताल में भर्ती  कराया। तीन घायलों के आने के बाद घायलों की संख्या 41 पहुंच गई है। सोमवार  सुबह घायल अनामिका, पंकज निवासी पुरा तथा  प्रदीप निवासी गंभीरपुर मलावन को भर्ती कराया गया। जिनका  जिला अस्पताल में इलाज चल रहा है।

जीटी रोड पर रोक दिया ट्रैफिक
 जैसे ही राजस्थान के राज्यपाल का काफिला जिला अस्पताल पहुंचा। उससे पहले  ही जीटी रोड पर वाहनों को रोक दिया गया। लगभग 20 मिनट तक जीटी रोड पर  वाहनों की लंबी लाइन लगी रही। गर्मी के चलते लोग परेशान रहे। छोटे वाहन  गलियों में से होकर निकले। वाहनों का काफिला पुलिस लाइन के लिए  रवाना हुआ तब जाकर रास्ता खोला गया। उधर, पुलिस लाइन में अधिकारी राज्यपाल  की गाड़ी को सीधे हैलीपैड पर ले गए, जबकि उन्हें वहां भोजन और दवा लेनी थी, जैसे ही गलती का अहसास हुआ तो प्रभारी डीएम साहब सिंह, एएसपी  विसर्जन सिंह यादव, एडीएम प्रशासन लालमणि व अन्य अधिकारी दौड़े और वापस  गाड़ी सम्मेलन कक्ष में लेकर पहुंचे, जहां खाना खाने के बाद राज्यपाल  दिल्ली के लिए रवाना हुए।


रह रहा हूं जयपुर में, पर दिल मेरा आपके पास
राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह ने कहा कि जयपुर दूर लगता है लेकिन दिल आपके पास है, जब भी राजभवन में अकेला बैठता हूं तो आप लोगों के बारे में ही सोचना हूं। यह जगह मेरी कर्मभूमि है। सोचते-सोचते जब मेरी आंखें नम हो जाती हैं तो उन्हें पोंछ लेता हूं। उन्होंने कहा कि राजभवन में उप्र प्रदेश खासकर अपने क्षेत्र के लोगों को उनसे मिलने के लिए समय नहीं लेना पड़ता। जब कोई यहां का व्यक्ति पहुंचता है तो उसे वह सीधे बुला लेते हैं। उन्होंने राजभवन का लोगों को नंबर भी दिया, बोले यदि किसी को मिलना हो या फिर कोई काम हो तो फोन घुमा देना।

राज्यपाल ने नहीं लिया गार्ड ऑफ ऑर्नर
 राज्यपाल कल्याण सिंह ने कहा कि उन्होंने यहां आने से पहले ही कह दिया था  कि यह मेरा सरकारी दौरा नहीं है निजी दौरा है। इस दु:ख की घड़ी में न मुझे  गार्ड ऑफ ऑर्नर दिया जाए और न ही मेरा स्वागत किया जाए और न ही रेड कारपेट  बिछाया जाए, जबकि राज्यपाल के आगमन पर ऐसा होता है।
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