एटा। कोतवाली देहात पुलिस और एसओजी ने जहरीली शराब बनाते तीन लोगों को पकड़ा दिखाकर अपनी पीठ थपथपाई, लेकिन पुलिस की यह कहानी अदालत में साबित नहीं हो सकी। अदालत ने तीनों को दोषमुक्त कर दिया।
अभियोजन पक्ष के मुताबिक 28 फरवरी 2010 को थाना प्रभारी इंद्रेश कुमार सिंह भदौरिया ने टीम सहित नगला बनवारी जाने वाले रास्ते भट्ठा की खाली जगह में शराब की भट्ठियां संचालित
देखीं। इस पर एसओजी टीम को फोन कर बुला लिया। यहां देखा कि अलग-अलग भट्ठी जलाकर जहरीली शराब बनाई जा रही थी। मौके से बबलू, सुमित, श्यामबाबू सभी निवासी शिवसिंहपुर को पकड़ लिया। जबकि गिरोह का सरगना राजेश निवासी नगला बनवारी भाग गया। बाद पुलिस ने उसे भी पकड़ लिया।
मामला अदालत में पहुंचा। सुनवाई के दौरान बबलू की मौत हो गई। अन्य तीनों के मामले में सुनवाई की गई। इसमें पुलिसकर्मियों ने दर्ज किए गए घटनाक्रम को अपनी गवाही में दोहराया।
जबकि आरोपियों ने मामला झूठा बताया। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कक्ष संख्या 1 ने अपने परीक्षण में पाया कि पुलिस ने थाने से रवानगी की जीडी पेश नहीं की। ऐसे में घटनास्थल पर उसकी उपस्थिति संदिग्ध प्रतीत होती है। यह भी नहीं बताया गया कि घटनास्थल पर पुलिस किस अपराधी की तलाश में गई थी।
बरामद माल को अदालत के समक्ष पेश नहीं किया गया और न ही उसे साबित कराया गया। अदालत ने इस पर भी सवाल खड़ा किया कि बिना किसी जांच के पुलिस ने मौके पर ही शराब के जहरीली होने का निष्कर्ष कैसे निकाला? इस संबंध में कोई परीक्षण रिपोर्ट अदालत में पेश नहीं की गई।