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लड़खड़ाती व्यवस्थाओं पर शहर का डगमगाता सफर

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हाथीगेट चौराहे पर हाथों के इशारे से यातायात संचालित करता पुलिसकर्मी ।संवाद - फोटो : ETAH
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एटा। जिला मुख्यालय होने के बावजूद शहर में यातायात के बेहतर संचालन के लिए मुकम्मल व्यवस्थाएं नहीं की गईं। सबसे बड़ी अव्यवस्था ट्रैफिक लाइट सिग्नल न होने से बनी हुई है। वहीं करीब दो साल पहले चौराहों पर बनाए गए ट्रैफिक प्लेटफॉर्म (बूथ) भी क्षतिग्रस्त हो चुके हैं, जिनका इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है। लड़खड़ाती यातायात व्यवस्थाओं पर शहर का सफर डगमगाता हुआ चल रहा है।
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यूं तो पहले शहर में यातायात संचालन के लिए सिग्नल का प्रस्ताव बनाया गया, लेकिन यह फाइलों में कैद रहा। ट्रैफिक संचालन आज भी हाथों से ही किया जा रहा है। बेतरतीब संचालन की वजह से लोग जाम से जूझ रहे हैं। 2018 में सदर विधायक विपिन वर्मा डेविड ने शहर की इस समस्या और जरूरत को देखते हुए अपनी निधि से 10 लाख रुपये का प्रस्ताव दिया। लोक निर्माण विभाग को इसके लिए तकनीकी प्रस्ताव बनाने को पत्र भेजा, लेकिन लोक निर्माण विभाग ने इस कार्य में अक्षमता जाहिर कर दी।
इसके बाद पुलिस महकमे को प्रस्ताव भेजा गया। यहां से कुछ दिन आंतरिक विचार-विमर्श के बाद इसके लिए नगर पालिका द्वारा प्रस्ताव बनाने पर सहमति बनी। पालिका ने प्रस्ताव तैयार कर बोर्ड बैठक में रखा, जिसे मंजूरी भी मिल गई, लेकिन ट्रैफिक लाइट सिग्नल को अन्य कार्यों से अधिक महत्वपूर्ण नहीं समझा गया। इससे अलग एक प्रस्ताव पुलिस महकमे ने भी तैयार किए। 2019 में तत्कालीन एसएसपी स्वप्निल ममगाई ने शहर मुख्यालय के साथ ही जलेसर और अलीगंज तहसील मुख्यालय के लिए भी तिराहों-चौराहों पर ट्रैफिक लाइट सिग्नल लगवाने के लिए सर्वे कराया। प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा गया, जिस पर कोई जवाब ही नहीं मिला।
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