मेडिकल कॉलेज के एमसीएच विंग में एआरटी सेंटर में पड़ा ताला। संवाद
एटा। मेडिकल कॉलेज के एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी (एआरटी) सेंटर पर लटके ताले एचआईवी पीड़ितों के लिए जीवन और संघर्ष की बड़ी परीक्षा बन गए हैं। कर्मचारियों के काम पर न लौटने के कारण पिछले दस दिनों से मरीजों को बिना दवाएं लिए ही बैरंग लौटना पड़ रहा है।
दूरदराज के ग्रामीण इलाकों से किराए का खर्च उठाकर अस्पताल पहुंचने वाले ये मरीज न केवल अपनी सेहत के संकट से जूझ रहे हैं बल्कि व्यवस्था की लाचारी के आगे आर्थिक और मानसिक रूप से भी पूरी तरह टूट चुके हैं। एआरटी सेंटर के कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर 12 से 14 अक्तूबर तक कार्य बहिष्कार करने का एलान किया था। हालांकि दस दिन बीत जाने के बाद भी कर्मचारी काम पर नहीं लौटे हैं। मरीजों के सामने सबसे बड़ी समस्या दवाओं की उपलब्धता को लेकर है।
कई मरीज लंबी दूरी तय कर मेडिकल कॉलेज पहुंचते हैं। आने-जाने में समय और किराया खर्च करने के बाद भी जब उन्हें दवा नहीं मिलती तो परेशानी का सामना करना पड़ता है। एचआईवी पीड़ित मरीजों के लिए नियमित रूप से एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी (एआरटी) की दवाएं लेना बेहद जरूरी होता है। ऐसे में सेंटर बंद रहने से मरीजों की चिंता बढ़ गई है।