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Etah News: मेडिकल कॉलेज में थैलेसीमिया की होगी जांच

Tue, 26 Mar 2024 11:28 PM IST
आगरा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
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एटा। जिले में स्वास्थ्य सेवाएं लगातार सही हो रहीं हैं। अब जिले के लोगों को थैलेसीमिया की जांच के लिए दूसरे जनपदों की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। क्योंकि अप्रैल माह से मेडिकल कॉलेज में जांच और स्क्रीनिंग शुरू होने जा रही है।थैलेसीमिया रोग से ग्रसित बच्चों को खून की जरूरत पड़ती है। इसको देखते हुए मेडिकल अस्पताल में थैलेसीमिया की जांच शुरू हो रही है। क्योंकि थैलेसीमिया बीमारी को रोकने का एकमात्र उपाय जागरुकता ही है। अगर जागरूक होकर कोई महिला या पुरुष थैलेसीमिया की जांच कराता है और उसकी पुष्टि होती है। तो उस मरीज व अभिभावकों की स्क्रीनिंग की जाती है। साथ ही उसके परिजनों की भी जांच की जाती है। जांच के लिए जिले के लोगाें को दूसरे जनपदों जाना पड़ता है, लेकिन अब जांच की व्यवस्थाएं जिले में ही की जा रही हैं। लैब टेक्नीशियन विजेंद्र कुमार ने बताया पैथोलॉजी लैब में अप्रैल माह से थैलेसीमिया की जांच शुरू हो जाएगी। इसके लिए प्रक्रिया चल रही है।
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थैलेसीमिया के लक्षण
थैलेसीमिया रोगियों में रक्त की कमी या एनीमिया हो सकता है। जन्म के तीन महीने बाद कभी भी इस बीमारी के लक्षण नजर आ सकते हैं। बच्चों के नाखून और जीभ पीली पड़ जाने से पीलिया का भ्रम पैदा हो जाता है। बच्चे के जबड़ों और गालों में असमानता आ जाती है। बच्चे का विकास रुक जाता है और वह उम्र से काफी छोटा नजर आता है। सूखता चेहरा, वजन न बढ़ना, हमेशा बीमार नजर आना, कमजोरी, सांस लेने में तकलीफ प्रमुख लक्षण हैं।
-वर्जन


थैलेसीमिया एक अनुवांशिक रोग है और माता अथवा पिता या दोनों के जींस में गड़बड़ी के कारण होता है। रक्त में हीमोग्लोबिन दो तरह के प्रोटीन से बनता है। पहला अल्फा और दूसरा बीटा ग्लोबिन। दोनों में से किसी प्रोटीन के निर्माण वाले जींस में गड़बड़ी होने पर थैलेसीमिया रोग होता है। इसकी जांच अप्रैल से मेडिकल कॉलेज में शुरू होने लगेगी, इससे मरीजों को काफी लाभ मिलेगा।
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डा. सुरेश चंद्रा, सीएमएस
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