टीईटी अनिवार्यता को लेकर नायब तहसीलदार को ज्ञापन सौंपते शिक्षक। संवाद
एटा। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार भारत में प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक शिक्षिकाओं को टीईटी परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य किया है। टीईटी अनिवार्यता कानून को वापस कराने की मांग को लेकर अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ के बैनर तले सोमवार को जिले के शिक्षक शिक्षिकाओं ने एकत्रित होकर शहीद पार्क से कलेक्ट्रेट परिसर तक हाथों में मशाल जुलूस निकाला। काला कानून वापिस लिखीं पट्टिकाएं लेकर सड़कों पर पैदल मार्च निकाला हजारों की संख्या में उपस्थिति जनसमूह की साउंड सिस्टम के माध्यम से टीईटी अनिवार्यता समाप्त करने की मांगों की।
कलेक्ट्रेट पर पहुंच कर शाम को जिलाधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री, केंद्रीय शिक्षा मंत्री को संबोधित ज्ञापन दिया गया। शिक्षक संगठनों एवं शिक्षक शिक्षिकाओं ने मांग करते हुए कहा कि टीईटी लागू होने से आरटीई एक्ट लागू होने से पूर्व नियुक्त किए गए शिक्षको पर टीईटी की अनिवार्यता लागू करना न्याय संगत नहीं है। जब इन शिक्षकों की नियुक्ति उस समय की प्रचलित नियमावली के अनुसार हुईं थीं तब टीईटी अनिवार्यता लागू नहीं थी । लगभग 25-30 वर्ष की सेवा एवं अनुभव वाले शिक्षकों को टीईटी से मुक्त रखा जाना न्यायहित में है। टीईटी अनिवार्यता कानून की समस्या पर फिर से विचार करते हुए शिक्षकों को इस अनिवार्यता से मुक्त कराने की कृपा की जाए। इस दौरान संयोजक प्रवीण कुमार फ़ौजी, राधेश्याम यादव,ओमेंद्र प्रताप सिंह, उमेश दिनकर, वीरपाल सिंह, प्रवेश बघेल, सौरव मिश्रा शिल्पी, बलराम गुप्ता, अनुराग उपाध्याय, राहुल कुमार, भानु प्रताप बौद्ध, धर्मेंद्र यादव, राजूराम रत्न, श्रीकांत यादव, राजेश यादव समेत कई लोग मौजूद रहे।