एटा। उप्र राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन संविदा कर्मचारी संघ के तहत संविदा स्वास्थ्यकर्मियों की हड़ताल बृहस्पतिवार को तीसरे दिन जारी रही। बूंदाबांदी में भी कर्मचारी धरने पर डटे रहे। इस दौरान प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी पहुंचे। कर्मचारियों का आरोप है कि अधिकारियों ने धरने से उठाने के लिए दबाव बनाया। हड़ताल से क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल रहीं।
हड़ताली संविदा चिकित्सक व कर्मचारी सीएमओ कार्यालय परिसर में धरना दे रहे हैं। बृहस्पतिवार को दोपहर के समय हल्की बूंदा-बांदी होती रही, इसके बावजूद कर्मचारी धरने से नहीं हटे। दोपहर बाद एडीएम (प्रशासन) आलोक कुमार और सीओ सिटी कालू सिंह धरना स्थल पर पहुंचे। समझाने का प्रयास किया। कर्मचारियों का आरोप है कि न हटने पर दबाव बनाकर हटाने की कोशिश की गई। उधर, हड़ताल के चलते देहात क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल रहीं। संविदा कर्मी और चिकित्सक हड़ताल पर रहे और नियमित स्टाफ की बेहद कमी थी। ऐसे में अधिकांश मरीजों को स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिल सकीं।
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हड़ताल के चलते फोकस सैंपलिंग में आई रुकावट
सीएमओ डॉ. उमेश कुमार त्रिपाठी का कहना है कि संविदा कर्मियों ने हड़ताल गलत समय पर की है। अभी कोविड टीकाकरण चल रहा है। वहीं स्वास्थ विभाग की ओर से फोकस कोविड सैंपलिंग में परिषदीय विद्यालयों, डिग्री कॉलेज, सार्वजनिक स्थलों पर कोरोना की जांच कराई जानी है। इसके लिए तैयारियां की जा रही थीं। संविदा कर्मियों और डॉक्टरों की हड़ताल होने से इसमें रुकावट आ गई है।
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संविदा कर्मियों की हड़ताल से ग्रामीण और शहरी क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं पर कोई असर नहीं पड़ा है। टीकाकरण की गति धीमी हुई है। मांगों को लेकर ऊपर रुतर से वार्ता होनी है। ऐसे में हड़ताल का यहां से समापन नहीं किया जा सकता। प्रयास किया गया था लेकिन कोई बात नहीं बनी।
डॉ. उमेश कुमार त्रिपाठी, सीएमओ