एटा। कोतवाली देहात क्षेत्र के गांव सरदलगढ़ में मंगलवार की रात महेंद्र सिंह को चार गोलियां मारकर हत्या के मामले में बेटा ही कातिल निकला है। पुलिस की पूछताछ में कई राज सामने आए हैं। एसएसपी उदय शंकर सिंह ने बताया कि हत्या के बाद कोतवाली देहात प्रभारी निरीक्षक जगदीश चंद्र को टीम के साथ मामले के खुलासे के लिए लगाया गया था। पुलिस टीम ने मृतक महेंद्र सिंह के छोटे पुत्र यतेंद्र सिंह को हिरासत में लेकर पूछताछ की तो वह टूट गया और जुर्म कबूल कर लिया।
यतेंद्र ने बताया कि पिता के संबंध चाची से थे और मां अंगूरी देवी को 15 साल पहले घर से निकाल दिया था। मां दोनों पुत्र किशनपाल और यतेंद्र को लेकर दिल्ली चली गई और मजदूरी करने लगी। करीब 10 साल पहले लौटी और अमांपुर में अपने पिता की बुआ के घर में रहने लगी। पांच साल पहले यतेंद्र की शादी हुई तो पत्नी को लेकर गांव सरदलगढ़ में आकर रहने लगा। पिता के हिस्से में करीब 12 बीघा जमीन थी। इसमें से 2 बीघा जमीन का बैनामा पिता ने अपने चाचा चित्रपाल उर्फ चेतराम के नाम कर दिया था।
एसएसपी का कहना है कि आरोपी की चाची की 10 साल पहले मृत्यु हो गई। जिसके साथ उसके पिता के अवैध संबंध थे। पिता चाची के पुत्रों के साथ ही रहते थे और मना करने पर भी नहीं मानते थे। कुछ दिन पहले ही जानकारी मिली कि वह शेष जमीन को भी चाची के पुत्रों के नाम करना चाहते हैं। तभी से यतेंद्र ने पिता की हत्या करने की योजना बनाना शुरू कर दी। छह जुलाई की रात करीब 12:30 बजे मूंग के खेत में चारपाई पर सो रहे अपने पिता की गोलियां मारकर हत्या कर दी।