उत्तर प्रदेश के एटा में किसान के खेत की मिट्टी कैसी है, इसकी सेहत जानने के लिए जिला मुख्यालय पर प्रयोगशाला बनाई गई है। लेकिन इसमें सूक्ष्म तत्वों की जांच करने वाली मशीन करीब एक वर्ष से अधिक समय से खराब पड़ी है। कागजों में जांच की जा रही है और किसानों को गुमराह करके मृदा स्वास्थ्य कार्ड तैयार कर वितरित किए जा रहे हैं।
कृषि विभाग की ओर से मिट्टी की सेहत जांचने के बाद किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड दिया जाता है। इसमें कई पैरामीटर पर जांच की जाती है, इसके अलावा सूक्ष्म तत्वों की जांच की जाती है। सूक्ष्म पोषक तत्वों में कार्बन, हाइड्रोजन, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटेशियम, सल्फर, कैल्शियम, मैग्निशियम, आयरन, बोरॉन, तांबा और क्लोरीन आदि शामिल होते हैं।
इनकी जांच के लिए जिला मुख्यालय पर बनाई गई लैब में इटोमिट स्पेक्ट्रोफोटोमीटर मशीन लगाई गई थी। यह मशीन ही सूक्ष्म पोषक तत्वों की जांच करती है, लेकिन मशीन को खराब हुए करीब एक वर्ष से अधिक समय हो गया है। जांच कागजों में होकर किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड दिए जा रहे हैं।
जांच के लिए लाखों रुपये के केमिकल्स आते हैं, इनका कोई पता नहीं है। ऐसे में जांच कागजों पर चल रही है और किसानों को गुमराह करके कार्ड वितरित कर दिए जाते हैं। चालू वर्ष में 80 गांवों की मिट्टी की सेहत जांचने का लक्ष्य मिला है, जब कि पिछले वर्ष करीब 6 हजार नमूनों की जांच की गई थी।
मृदा स्वास्थ्य लैब प्रभारी आशुतोष कुमार ने बताया कि मशीन एक वर्ष से खराब है, नमूनों की जांच अलीगढ़ में करके मृदा स्वास्थ्य कार्ड किसानों को पिछले वर्ष वितरित किए गए हैं।