रोडवेज बस स्टैंड पर रैन बसेरा न होने से ठंड में लेटे और बैठे हुए यात्री। संवाद
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एटा। रात के समय बस के इंतजार में रोडवेज बस स्टैंड पर तमाम यात्रियों को रुकना पड़ता है। यहां नगर पालिका द्वारा अभी तक अस्थायी रैन बसेरा नहीं बनाया गया है। जबकि स्थायी रैन बसेरा यहां से करीब दो किमी दूर मेडिकल कॉलेज परिसर में बना हुआ है। जानकारी के अभाव और दूरी के चलते यात्री इस आश्रय स्थल में नहीं पहुंच पाते। 30 बेड की क्षमता के इस आश्रय स्थल में बुधवार रात केवल सात लोग रुके। जबकि बस स्टैंड पर तमाम लोग ठंड में ठिठुरने को मजबूर थे।
आधी नवंबर बीतने को है। रात के समय खासी सर्दी होने लगी है। रोडवेज बस स्टैंड पर हर साल नगर पालिका द्वारा अस्थायी रैन बसेरा बनवाया जाता है, जो अभी तक नहीं बनाया गया है। बुुधवार रात अमर उजाला टीम ने पड़ताल की तो बस स्टैंड पर कई यात्री टीनशेड के नीचे सोते मिले। वहीं कुछ यात्री सर्दी लगने की वजह से सिकुड़े हुए बैठे थे। कुछ यात्रियों को अलीगढ़, तो कुछ को मैनपुरी, कन्नौज व कानुपर तक जाना था। उन्होंने बताया कि बस नहीं हैं, सड़क पर सर्दी लग रही थी तो यहां आकर बैठ गए। स्थानीय दुकानदारों से रैन बसेरा के बारे में पूछा तो मेडिकल कॉलेज का पता बताया। हम बाहर के लोग हैं, वहां जाने का रास्ता नहीं पता था। इसलिए यहीं रात काट रहे हैं।
इसके बाद अमर उजाला की टीम मेडिकल कॉलेज परिसर में बने आश्रय स्थल में पहुंची। वहां दो साधु, दो आगरा से आए व्यक्ति, एक महिला व दो अन्य व्यक्ति सोते हुए मिले। आश्रय स्थल की संचालिका गीता देवी ने बताया कि यहां 30 बेड हैं। हाथरस की एक संस्था द्वारा इस आश्रय स्थल का संचालन किया जा रहा है। आने वालों के लिए बिस्तर, कंबल आदि सभी व्यवस्थाएं हैं। अभी लोग कम ही आ रहे हैं।