मारहारा स्थित खानकाह-ए-बरकातिया के सज्जादानशीन रसूल आले एवं मोहम्मद पैगंबर साहब के वारिस सैय्यद नजीब मियां ने तीन तलाक और समान नागरिक संहिता मुद्दे पर चुप्पी तोड़ी है। अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने कहा है कि देश के मुसलमानों को सरकार का हर कानून मंजूर होगा, लेकिन शरीयत में दखलंदाजी किसी भी कीमत पर मंजूर नहीं। उन्होंने कहा कि 11 नवंबर से मारहरा में होने वाले तीन दिवसीय उर्स कासमी में देश भर के मुस्लिम धर्मगुरु और शरीयत विशेषज्ञ शिरकत करेंगे। उर्स में तीन तलाक, समान नागरिक आचार संहिता पर मंथन कर देश के नाम संदेश दिया जाएगा।
सैय्यद नजीब मियां ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज बेटी बचाओ और बेटी पढ़ाओ को नारा बुलंद कर रहे हैं, लेकिन 1400 साल पहले मोहम्मद पैगंबर साहब ने भ्रूण हत्या पर रोक लगाने का संदेश दिया था। वर्षों पहले मारहरा के खानकाह-ए-बरकातिया ने देश में आधी रोटी खाएंगे, बच्चों को पढ़ाएंगे का नारा दिया था। उन्होंने कहा शरीयत में महिलाओं को सबसे ज्यादा हुकूक दिए हैं। जो महिलाएं आज शरीयत के खिलाफ आवाज बुलंद कर रहंीं हैं। उन्हें शरीयत की एबीसीडी पता नहीं है बेहतर होगा सरकार देश में अन्य मुद्दों पर ध्यान दे, मुस्लिम समाज को चलाने का काम शरीयत विशेषज्ञों पर छोड़ दें। उन्होंने कहा कि देश की न्याय पालिका में मुसलमानों की आस्था है। मुस्लिम महिलाएं न्याय के लिए कोर्ट में जातीं हैं। इससे मुस्लिम समाज या शरीयत विशेषज्ञों को कोई ऐतराज नहीं है।
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शरीयत विशेषज्ञों की सुनिए
मिस्र के विश्वविद्यालय अल अजहर से शिक्षा प्राप्त मुफ्ती मोहम्मद इरफान ने कहा कि भारत एक धर्म निरपेक्ष देश है। यहां सिविल कोर्ट कानून लागू नहीं हो सकता। हम ऐसे किसी कानून को नहीं मान सकते जो शरीयत में दखलंदाजी करेगा। मुफ्ती मोहम्मद इकबाल नूरी ने कहा तलाक के मुद्दे पर बीच का रास्ता निकालने का मतलब है इस्लाम से खारिज हो जाना। प्रधानमंत्री का मुस्लिम महिलाओं को न्याय दिलाने का बयान राजनीतिक है।
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उर्स काजमी में दूर-दूर से आते है जायरीन
उर्स कासमी में पाकिस्तान के अलावा इंग्लैंड, दक्षिण अफ्रीका, आस्ट्रेलिया समेत कई देशों से जायरीन आते हैं। खुफिया विभाग की माने तो सीमा पर तनाव के चलते इस बार अभी तक किसी पाकिस्तानी जायरीन के वीजा की जांच नहीं आई है। हालांकि टूरिस्ट वीजा पर कुछ विदेशी जायरीन आ सकते हैं।