स्वच्छ भारत मिशन के तहत नगरीय क्षेत्रों के लोगों से शौचालयों के लिए ऑनलाइन आवेदन मांगे जा रहे हैं, लेकिन ई-सुविधा देने वाली शहर की संस्थाएं ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों से भी आवेदन करा रही हैं। कई तो पालिका ने निरस्त कर दिए हैं।
शौचालयों के लिए अब तक पालिका के पास छह हजार आवेदन आ चुके हैं, जिनमें आधे से ज्यादा ग्रामीण क्षेत्र के हैं। पंचायती राज विभाग ग्रामीणों को ऐसा न करने की सलाह दे रहा है। स्वच्छ भारत मिशन के तहत केंद्र सरकार देश भर में शौचालयों के निर्माण को प्राथमिकता दे रही है। इसमें नगरीय क्षेत्रों में बनने वाले शौचालयों की जिम्मेदारी पालिका और ग्रामीण क्षेत्रों में बनने वाले शौचालयों की जिम्मेदारी पंचायती राज विभाग संभाल रहा है। नगरीय क्षेत्र में शौचालयों के निर्माण के लिए जहां ऑनलाइन आवेदन मांगे जा रहे हैं, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में वर्ष 2012 में किए गए बेस लाइन सर्वे के आधार पर ग्रामीणों को शौचालयों का आवंटन किया जा रहा है। स्थानीय नगर पालिका की मानें तो बीते काफी समय से लोगों की ओर से शौचालयों के लिए ऑनलाइन आवेदन किए जा रहे हैं। आवेदनों की संख्या छह हजार से ऊपर पहुंच चुकी है। इसमें 60 प्रतिशत के आसपास ग्रामीण क्षेत्रों के आवेदन हैं, जिन्हें पालिका ने निरस्त किया है।