जलेसर(एटा)। सर्व शिक्षा अभियान के तहत नौनिहालों के भविष्य संवारने के लिए परिषदीय, राजकीय व सहायता प्राप्त विद्यालयों में कक्षा 1 से 8 तक के विद्यार्थियों को मुफ्त पुस्तकें दी जाती हैं, लेकिन यहां किताबें बड़ी संख्या में रद्दी में बेच दी गईं। मामले में शिक्षा विभाग के जिम्मेदार सवालों के घेरे में हैं कि पुस्तकें आखिर रद्दी में कैसे पहुंच गईं?
एक अप्रैल से नया शैक्षिक सत्र शुरू हुआ था। इस दौरान कक्षा 3 से 8 तक के 110312 विद्यार्थियों के लिए 1132326 पाठ्य पुस्तकें आईं। बेसिक शिक्षा कार्यालय से इनको बीआरसी पर भेज विद्यालयों में भेजा गया। बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों की मानें तो पाठ्य पुस्तकों का वितरण विद्यालयों में भी बच्चों को कर दिया गया।
इसकी जानकारी बेसिक शिक्षा विभाग ने उच्चाधिकारियों को दे दी। जिले में पाठ्य पुस्तकों का वितरण शत-प्रतिशत मान लिया गया। मंगलवार को एक युवक जलेसर कस्बे में एक कबाड़ की दुकान पर रद्दी बेचने के लिए पहुंचा। दुकानदार को यह युवक पहले भी रद्दी दे जाता था। लेकिन मंगलवार को इसमें पाठ्य पुस्तकें थीं।
पूछताछ के दौरान उसने दुकानदारों को बताया कि गांव से रद्दी खरीदकर लाता है, जिसे बाजार में देता है। यह पाठ्य पुस्तकें भी खरीदकर लाया और यहां बेचने चला आया। बताया गया कि बड़ी मात्रा में उसके पास पाठ्य पुस्तकें हैं। बुधवार को कुछ अन्य ठेल पर भी इसी सत्र की पुस्तकें रद्दी में देखी गईं। प्रत्येक पर प्रदेश सरकार का मोनोग्राम और कोड नंबर छपा था।
दुकानदारों ने बताया कि पिछले छह दिन से सुबह के समय कुछ लोग आते हैं और कापी-किताबें रद्दी के भाव छह रुपये किलो की दर से दुकानदारों को बेच जाते हैं। मामले में सर्व शिक्षा अभियान के जिला समन्वयक अरुण शर्मा ने बताया कि मामला संज्ञान में आया है। जलेसर में जांच कराई जा रही है।