एटा। प्रधानमंत्री आवास योजना में पात्रों के चयन में नगर निकायों ने जल्दबाजी दिखाई, बिना जांचे-परखे ही लोगों के नाम सूची में दर्ज कर दिए। सूची डूडा के पास आई तो सभी को आवासों की स्वीकृति मिल गई। इसके बाद पहली किस्त आवंटन की प्रक्रिया शुरू हुई। इसमें निकायों का खेल पकड़ा गया है। डूडा ने पहली किस्त के लिए पात्रों का सर्वे कराया तो 1661 ऐसे नाम पाए गए, जो ढूंढे नहीं मिल रहे। विभाग ने नगर निकायों में सूची चस्पा कराई तो अब तक 14 पात्रों ने आपत्ति दर्ज कराई है।
जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत सभी निकायों से आवेदन लिए थे। नगर निकायों से डूडा विभाग को आवेदन भेजे। जहां नगर निकायों ने जांच के बाद 7350 पात्रों को चिह्नित किया। सूची मिलने के बाद पात्रों के खाते में धनराशि भेजने की प्रक्रिया की गई, लेकिन इसमें 1661 पात्र ऐसे निकले, जिनका पता ही नहीं चला। इस पर विभाग ने करीब दो माह पूर्व निकायों में सूची चस्पा कराते हुए एक माह का समय दिया। जो भी सूची के पात्र हैं वह कार्यालय आकर संर्पक करें, लेकिन जिले में 14 पात्रों ने ही अब तक आपत्ति दर्ज कराई है।
एटा सूची के सबसे ज्यादा पात्र गायब
सभी नगर निकायों में सबसे ज्यादा एटा में गड़बड़ी हुई है। जहां 1547 में 398 पात्र गायब हैं। वहीं दूसरे नंबर पर जलेसर व तीसरे नंबर पर अलीगंज का नंबर है।
130 के सापेक्ष पांच को मिले आवास
निधौली कलां। ब्लाक के गांव मनौरा पंचायत में लगभग 180 परिवार है। यहां के लोग मूलभूत सुविधाओं से भी वंचित है। यहां के लोगों के पास गैस कनेक्शन के साथ बिजली कनेक्शन भी नहीं है। हद तो यह है कि यहां के लोग आवास के लिए भी वंचित है। वह तिरपाल लगाकर जीवन यापन कर रहे है।
गांव के प्रधान ग्रंध सिंह ने बताया कि उनकी पंचायत में अब तक सिर्फ पांच आवास मिले है। जबकि 130 की सूची उनके द्वारा उच्चाधिकारियों को दी गई थी। ग्रामीण श्यामलाल, तालेवर, हरदेवी, मुन्नी देवी, किरन देवी, पुष्पा देवी, आरती देवी, अलका देवी, शीला देवी, श्री निवास, रामवीर सिंह, खुशपाल, गंगासिंह ने बताया वह आवास के लिए कई वार उच्चाधिकारियों के पास चक्कर लगा चुके है, लेकिन उनकी सुनने बाला कोई नहीं है।
पीएम आवास योजना के तहत सभी नगर निकायों से दो बार आवेदनों की सूची मांगी गई। सूची आने के बाद उसका सर्वे कराया गया। जहां 1661 पात्रों का पता नहीं चल रहा था। नगर निकायों में सची चस्पा की गई। जहां अब तक 14 पात्र निकल कर सामने आए हैं।
आरके चौबे, एपीओ।