एटा। जलेसर क्षेत्र में स्थित पटना पक्षी विहार को वेटलैंड रामसर साइट में शामिल कर दिया गया है। इसके बाद पटना पक्षी विहार उत्तर प्रदेश का 11वां वेटलैंड रामसर साइट बन गया है। यह जानकारी केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने सोशल मीडिया हेंडल एक्स पर मैसेज के माध्यम से दी।
पटना पक्षी विहार अब रामसर साइट घोषित कर दिया गया है। इससे न केवल प्रदेश की जैव विविधता बल्कि पूरे देश के पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को नई मजबूती मिलेगी। पटना पक्षी विहार में अब तक 178 पक्षी प्रजातियां और 252 से अधिक वनस्पतियों की प्रजातियां दर्ज की जा चुकी हैं।
यह क्षेत्र जलीय पक्षियों के संरक्षण की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय संस्था बर्ड लाइफ इंटरनेशनल ने इसे महत्वपूर्ण पक्षी व जैव विविधता क्षेत्र (आइबीए) के रूप में भी घोषित किया है। पटना पक्षी विहार धार्मिक पर्यटन और प्रकृति आधारित पर्यटन का भी प्रमुख केंद्र है। यहां एक प्राचीन शिव मंदिर भी है जो श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है।
नए अवसर होंगे सृजित
डीएफओ आगरा ने बताया कि रामसर साइट में शामिल होने के बाद पटना पक्षी विहार में संरक्षण, पर्यटन और स्थानीय आजीविका के नए अवसर सृजित होंगे।
पक्षियों का कलरव पर्यटकों को करता है मोहित
पटना पक्षी विहार में खजूर का वन पर्यटकों को काफी आकर्षित करता है। झील किनारे इस वन में पक्षी विचरण करते हैं और उनका कलरव लोगों का मन मोह लेता है। यहां अक्तूबर माह के अंत में पक्षी आने शुरू हो जाते हैं। इनमें राजहंस, बार हैडेड गूज, नीलसर, पिटेल, किगफिशर, सोवलर, जयकान, डबचिक, स्नेक बर्ड, कामन मोर हैन, कामन टील, काटन टील, काम डक, स्काट बिल, कूट, ब्रह्मनी डक, आइविश आदि देशी-विदेशी प्रजाति के पक्षी शामिल रहते हैं।
साल 1990 में हुई थी पटना पक्षी विहार की स्थापनाः
डीएफओ आगरा चांदनी सिंह ने बताया कि पटना पक्षी बिहार की स्थापना साल 1990 में हुई थी। यह करीब 108 हेक्टेयर भूमि में बना हुआ है। यहां सर्दियों में बड़ी संख्या में प्रवासी और निवासी पक्षियों के रहने के कारण 1990 में अभ्यारण्य घोषित किया गया। इसका जलेसर तहसील के गांव पटना के नाम पर रखा गया।
पीएम ने जिलावासियों को दी बधाई..
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिलावासियों को बधाई एवं शुभकामनाएं दी। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया एक्स पर ट्वीट करते हुए कहा कि पटना पक्षी विहार का रामसर सूची में शामिल होना पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन तथा प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे एटा जनपद को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान प्राप्त हुई है। जिलाधिकारी प्रेम रंजन सिंह ने भी जिलावासियों को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि पूरे जनपद के लिए गौरव का क्षण है।