एटा। परिजन अपने बच्चों से प्यार करते हैं, लेकिन यह प्यार बच्चों की जान व नियम-कानून से खिलवाड़ बन रहा है। किशोरों के हाथों में बाइक-स्कूटी के हैंडल थमाए जा रहे हैं। इसी महीने में 200 से अधिक नाबालिगों के चालान काटे जा चुके हैं। जांच में इनके वाहन पापा के या चाचा के निकले।
नियम है कि 18 वर्ष से कम आयु के किशोर व बच्चों का न तो ड्राइविंग लाइसेंस बनेगा और न ही वह वाहन चला सकते हैं। इसके पीछे मंशा सिर्फ यही है कि किशोर और बच्चे ड्राइविंग को लेकर परिपक्व नहीं होते। ऐसे में वह अपनी और दूसरों की जान खतरे में डाल सकते हैं। यह बात उनके अभिभावक व परिजन भी अच्छी तरह जानते हैं। लेकिन बच्चों से भावनात्मक लगाव और उनकी जिद के आगे समझौता कर बैठते हैं। तमाम अभिभावक कम उम्र के बच्चों को खुद ही दुपहिया वाहन चलाना सिखाते नजर आ जाते हैं। स्कूल-कोचिंग जाते समय ये बच्चे कभी पापा तो कभी चाचा या बड़े भाई-बहन की बाइक-स्कूटी लेकर घर से निकल आते हैं। नियमानुसार केवल 50 सीसी क्षमता और 25 किमी प्रति घंटा की अधिकतम रफ्तार वाले वाहन को ही किशोर चला सकते हैं।
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यह हो सकती है कार्रवाई
- अभिभावक के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता के तहत मुकदमा दर्ज हो सकता है।
- किशोरों को ड्राइविंग लाइसेंस के लिए 25 वर्ष तक अपात्र ठहराया जा सकता है।
- अभिभावकों पर 25 हजार रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है।
- नाबालिग को वाहन देने वाले को 3 साल जेल की सजा हो सकती है।
- 12 महीने के लिए वाहन सीज किया जा सकता है।
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वर्जन
नाबालिगों के द्वारा वाहन चलाना गैरकानूनी है। विभिन्न स्कूल आदि में कार्यक्रम कर इसके बारे में छात्र-छात्राओं और उनके अभिभावकों को जागरूक किया जा रहा है। इस महीने चेकिंग अभियान में भी 1500 बच्चों को जागरूक किया गया है। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई भी लगातार की जा रही है। - धनंजय सिंह कुशवाहा, अपर पुलिस अधीक्षक