एटा। मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य से जुड़ी महत्वपूर्ण जननी सुरक्षा योजना का क्रियान्वयन जुलाई माह में सुस्त नजर आया है। मंत्रा पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों के अनुसार, महीने भर में 5,522 प्रसव कराए जाने के बावजूद सिर्फ 4,547 महिलाओं का ही पोर्टल पर पंजीकरण हो सका है। इसके अलावा, 4,145 प्रसूताओं को ही योजना के तहत आर्थिक लाभ मिल पाया है, जिससे 1,377 पात्र महिलाएं अब भी सहायता राशि का इंतजार कर रही हैं। स्वास्थ्य विभाग ने इस सुस्ती पर संज्ञान लेते हुए सभी लंबित पंजीकरण और भुगतान के मामलों को प्राथमिकता पर जल्द पूरा करने के निर्देश दिए हैं।
आंकड़ों के अनुसार प्रसव कराने वाली 975 महिलाओं का अब तक पंजीकरण तक नहीं हो सका है, जबकि पंजीकृत लाभार्थियों में भी 402 महिलाओं का भुगतान लंबित है। ऐसे में योजना का उद्देश्य समय पर आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना प्रभावित हो रहा है। स्वास्थ्य विभाग अब लंबित मामलों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराने की तैयारी में जुट गया है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि जिन प्रसूताओं का मंत्रा पोर्टल पर पंजीकरण नहीं हुआ है, उनके पंजीकरण की प्रक्रिया तत्काल पूरी कराने के निर्देश संबंधित कर्मचारियों को दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि सभी पात्र महिलाओं का पंजीकरण कराकर उन्हें योजना का लाभ दिलाया जाएगा। साथ ही भुगतान से जुड़े लंबित मामलों का भी जल्द निस्तारण कराया जाएगा। विभागीय कर्मचारियों को नियमित निगरानी करने और किसी भी स्तर पर लापरवाही न बरतने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे जननी सुरक्षा योजना का लाभ प्रत्येक पात्र महिला तक समय पर पहुंच सके।
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इन स्वास्थ्य केंद्र पर हुए इतने प्रसव
ब्लॉक- कुल संस्थागत प्रसव की संख्या- मंत्रा पोर्टल पर प्रसव की संख्या- पंजीकृत प्रसूता
अलीगंज- 800- 815-760
अवागढ़- 566- 566-448
जैथरा- 665-623-512
जलेसर- 801- 804-629
मिरहची-459-481-379
सकीट- 491- 324-243
शीतलपुर- 319-324-269
मेडिकल कॉलेज- 1018-1078-872
अर्बन पीएचसी- 31-31-25
कुल- 5504-5522-4547