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जिले में अब उठी यूरिया की मांग

Wed, 17 Dec 2014 11:53 PM IST
ब्यूरो अमर उजाला एटा
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 जिले में महीने भर से चल रही डीएपी खाद की किल्लत के बाद अब यूरिया की मांग बढ़ गई है। हाल ही में हुई बारिश के बाद किसानों को फसलों में यूरिया लगानी पड़ रही है। कोआपरेटिव विभाग की मानें तो फिलहाल जिले में यूरिया पर्याप्त मात्रा में है, लेकिन फिर भी जिले में कई समितियों पर मंगलवार को यूरिया खत्म हो गई, इसके चलते किसान खासे परेशान दिखे। विभाग ने दावा किया है कि बुधवार तक उन सभी समितियों पर यूरिया की रैक पहुंच जाएगी।
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रबी की फसल के लिए इन दिनों जिले में यूरिया की मांग लगातार बढ़ती जा रही है। यूरिया लेने के लिए सहकारी समितियों पर किसानों की दिनभर भीड़ लगी रहती है। कोआपरेटिव विभाग भी पहले से अधिक सक्रिय हो गया है। डीएपी की तरह जिले के किसानों को यूरिया की भी किल्लत न झेलनी पड़े। इसके लिए यूरिया के स्टॉक पर बहुत ध्यान दिया जा रहा है। बता दें कि यूरिया के लिए शासन ने जिले को 21,775 एमटी यूरिया का लक्ष्य दिया है। इसके सापेक्ष जिले को अब तक 9,562 एमटी यूरिया प्राप्त हो चुकी है। इसके अलावा शासन द्वारा जिले को और यूरिया भेजी जा रही है। 




बता दें कि किसानों को इस बार जिले में डीएपी की भारी किल्लत झेलनी पड़ी। समितियों पर डीएपी न मिलने पर किसानों ने कई बार हंगामा काटा। इसके चलते जिला कोआपरेटिव को अलीगढ़, बरेली व पीलीभीत से सात सौ एमटी डीएपी मंगानी पड़ी। कोआपरेटिव विभाग के अनुसार डीएपी खाद की किल्लत की मुख्य वजह सहकारी समितियों की वित्तीय स्थिति ठीक न होना रही। शासन ने जिले का डीएपी व यूरिया का कम लक्ष्य निर्धारित किया था।
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यूरिया व डीएपी के आंकड़े
खाद              लक्ष्य                                        उपलब्धता
यूरिया         21775 एमटी                                 9562 एमटी
डीएपी        11 हजार एमटी(लगभग)           17034 एमटी+700 एमटी




मारहरा मिरहची में खत्म हुई यूरिया, किसान परेशान
मारहरा स्थित सहकारी समिति पर मंगलवार को यूरिया खत्म हो गई। इसके चलते बुधवार को किसान खासे परेशान रहे। मिरहची स्थित इफको केंद्र पर यूरिया खत्म हो जाने से भी किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ा। हालांकि मिरहची स्थित सहकारी समिति पर यूरिया की उपलब्धता है, लेकिन वहां सिर्फ खाता धारकों को ही यूरिया उपलब्ध कराई जा रही है। किसानों का आरोप है कि यदि इस समय यूरिया न ही मिली तो फसलों की पैदावार में नुकसान हो सकता है। वहीं, कोआपरेटिव की मानें तो जिन समितियों पर यूरिया खत्म हो रही है, वहां तुरंत यूरिया उपलब्ध कराई जा रही है।




जिले में डीएपी की मांग घट चुकी है। वहीं, यूरिया की मांग लगातार बढ़ रही है। अभी शासन से मांग के अनुसार यूरिया मंगाई जा रही है। फिलहाल जिले में यूरिया की कोई किल्लत नहीं है। यूरिया का स्टॉक ठीक रखने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं।
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- विनोद कुमार शर्मा, सहायक निबंधक, कोआपरेटिव एटा।
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