गांधी मार्केट स्थित दुकान पर बंटता राशन ।संवाद
- फोटो : ETAH
एटा। सरकारी खरीद में गेहूं न आने का असर दिखने लगा है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत अब चार महीने तक गेहूं का वितरण नहीं किया जाएगा। चार महीने तक केवल चावल ही बांटा जाएगा। यही नहीं पहले चक्र में भी प्रति यूनिट एक किलो गेहूं की कटौती की जाएगी। इससे गरीब वर्ग के परिवारों के समक्ष दाल-रोटी चलाने का संकट खड़ा हो गया है।
कोरोना काल से कार्डधारकों को दो चक्र में राशन बांटा जाता है। पहले चक्र में प्रदेश सरकार की ओर से और दूसरे चक्र में केंद्र सरकार की ओर से वितरण किया जाता है। दोनों ही चक्र में अब तक कार्डधारकों को प्रति यूनिट 3 किलो गेहूं और दो किलो चावल मिलता रहा था। लेकिन अब दूसरे चक्र की प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना में गेहूं का वितरण पूरी तरह बंद कर दिया गया है। इस महीने से केवल चावल ही बांटा जा रहा है। हालांकि कुल राशन की मात्रा में कमी नहीं की गई है। प्रति यूनिट पांच किलो चावल दिया जाएगा। यह क्रम सितंबर तक चलेगा। वहीं पहले चक्र में भी गेहूं में कटौती करने को आदेश जारी किया गया है। जिसके तहत अब एक यूनिट पर 2 किलो गेहूं और 3 किलो चावल बांटा जाएगा। जबकि पहले तीन किलो गेहूं और दो किलो चावल बांटा जाता रहा है।
जिले में तीन लाख राशन कार्ड
जिले में 309046 राशन कार्ड धारक हैं। जिनमें 1315927 यूनिट दर्ज हैं। इन सभी को प्रतिमाह 131592 क्विंटल राशन जरूरत होता है।
छह किलो से घटकर दो किलो हुआ गेहूं
राशन कार्ड धारकों को प्रति यूनिट दोनों चक्र मिलाकर कुल 6 किलो चावल मिलता था। जिससे गरीब परिवारों को महीने भर का गुजारा चल जाता था। लेकिन अब यह मात्रा घटकर कुल दो किलो रह गई। इतने कम गेहूं से महीने का खर्चा चलना नामुमकिन है। इस समय बाजार में आटा 22 रुपये किलो है। ऐसे में पांच सदस्य वाले परिवार को 440 रुपये प्रति माह आटा खरदीने में खर्च करने होंगे।