निर्जला एकादशी पर भक्तों में रहा उत्साह
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निर्जल एकादशी पर्व परंपरागत तरीके से मनाया गया। गृहणियों-युवतियों ने निर्जल व्रत कर पूजा अर्चना कर फल मिष्ठान आदि का दानपुण्य किया। इस अवसर पर शर्बत भरे कलशों का भी दान किया गया।
दो दिन के दशहरा पर्व के बाद गुरुवार का दिन भी पूजा अर्चना के नाम रहा। इस दिन लोगों ने निर्जल उपवास किया। साथ ही परंपरागत पूजा अर्चना की। मंदिरों में पहुंचकर दान पुण्य के साथ श्रद्धालुओं ने पंडित पुरोहितों एवं बुजुर्गों को मिट्टी के कलशों का भी दान किया। मंदिरों पर गुुरुवार को शर्बत प्याऊ का आयोजन किया गया। हजारों लोगों ने मीठा पेय पीकर आयोजकों को मनोकामना पूर्ण होने का आशीर्वाद दिया।
घड़ों के भाव चढ़े
बीस रुपये में मिलने वाले घड़े एकादशी पर्व के चलते महंगे हो गए। गुरुवार को इनका भाव चढ़कर तीस रुपये हो गया। मजबूर श्रद्धालुओं ने मुंहमांगा भुगतान किया। जीटी रोड, ठंडी सड़क एवं सिव सिंहपुर पर दुकानें लगाकर घड़ों की बिक्री हुई।
कासगंज निर्जला एकादशी पर्व पर दूसरे दिन गुरुवार को भी भक्तों में उत्साह देेखा गया। भक्तों ने वस्तुओं का दान देकर पुण्य अर्जित किया। महिलाओं ने उपवास रखकर मंगल कामना की। जगह-जगह धार्मिक अनुष्ठान भी संपन्न कराए गए।
भक्तों ने पर्व पर सुबह से ही अपनी तैयारियां कर लीं। भगवान विष्णु एवं उनके अवतारों से जुड़े मंदिरों में विशेष पूजा अर्चना कार्यक्रम संपन्न कराए गए। मंदिरों में एकादशी कथा का आयोजन किया गया, जिसमें काफी संख्या में लोगों ने सहभागिता कर पुण्य अर्जित किया। घरों पर भी पूजा कार्यक्रम संपन्न कराए गए। महिलाओं ने एकादशी व्रत कथा का पाठ किया। इसके बाद दान देने के लिए खरबूजा, हाथ का पंखा, घड़ा, वर्तन, चीनी, बूरा आदि को मंशने के बाद, निर्धनों को दान दिया गया। महिलाओं ने अपनी सास व अन्य मान पक्षों को भी इनको भेंट किया। मंदिरों में भी इन सामानों को पहुंचाया गया। बड़ी संख्या में ऐसे भक्त भी शामिल रहे जिन्होंने गर्मी के तेवरों को दर किनार कर बिना अन्न जल ग्रहण करे अपना उपवास रखा।